ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अप्रत्याशित हलचल देखने को मिली है। ब्राजील सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न केवल BRICS शिखर सम्मेलन के लिए, बल्कि एक विशेष ‘स्टेट गेस्ट’ के रूप में आमंत्रित किया, जिससे भारत-ब्राजील संबंधों को नई ऊंचाई मिली है। इस ऐतिहासिक आमंत्रण के जवाब में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सम्मेलन में भाग न लेने का फैसला किया, जिसे वैश्विक कूटनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने मोदी को रियो डी जेनेरियो में विशेष सम्मान देने की घोषणा की। इस कदम को चीन ने अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ और BRICS के भीतर प्रभाव के लिए चुनौती के रूप में देखा। सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग ने भारत को मिली इस विशेष प्राथमिकता पर असंतोष जताया और इसी कारण उन्होंने सम्मेलन से दूरी बना ली। यह पहली बार है जब BRICS जैसे महत्वपूर्ण मंच पर चीन के सर्वोच्च नेता ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई।
अमेरिका ने इस घटनाक्रम को ‘रियो रीसेट’ की संज्ञा दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ब्राजील का यह कदम BRICS के भीतर शक्ति संतुलन को बदल सकता है और भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकता है। अमेरिकी विश्लेषकों के अनुसार, चीन की अनुपस्थिति से भारत-ब्राजील साझेदारी को नई दिशा मिलेगी और अमेरिका को भी दक्षिण अमेरिका में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राजील के इस आमंत्रण से भारत की वैश्विक छवि को मजबूती मिली है और चीन को यह संदेश गया है कि BRICS के अन्य सदस्य देश अब केवल बीजिंग के इशारों पर नहीं चलेंगे। भारत के लिए यह कूटनीतिक जीत है, जिससे उसकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग में भूमिका और सशक्त होगी।
ब्राजील की विशेष आमंत्रण नीति से BRICS में हलचल: मोदी के स्वागत के चलते शी जिनपिंग ने छोड़ा शिखर सम्मेलन, अमेरिका ने कहा ‘रियो रीसेट’
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Mayank Kansara
- 25 June 2025
- 7:57 pm