DRDO की कानपुर स्थित लैब DMSRDE ने भारतीय तटरक्षक (ICG) जहाजों के लिए उच्च-दाब समुद्री जल शुद्धिकरण (डिसैलिनेशन) के लिए स्वदेशी ‘नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमेरिक मेम्ब्रेन’ विकसित की है।
यह मेम्ब्रेन समुद्री पानी में मौजूद क्लोराइड आयन के कारण जहाजों की स्थिरता पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है, जिससे तटरक्षक जहाजों की परिचालन जरूरतें पूरी होंगी।
तकनीक का विकास रिकॉर्ड 8 महीनों में किया गया और शुरुआती तकनीकी ट्रायल्स ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल (OPV) पर सफल रहे हैं।
अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस 500 घंटे के ऑपरेशनल टेस्टिंग के बाद दी जाएगी; फिलहाल यह यूनिट परीक्षण में है।
इस मेम्ब्रेन को मामूली बदलाव के साथ तटीय इलाकों में घरेलू उपयोग के लिए भी अपनाया जा सकता है, जिससे समुद्री जल शुद्धिकरण में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
DRDO का यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर है और सैन्य के साथ-साथ नागरिक क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।
DRDO ने भारतीय तटरक्षक जहाजों के लिए विकसित की स्वदेशी ‘नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमेरिक मेम्ब्रेन’ तकनीक
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Mayank Kansara
- 15 May 2025
- 9:26 pm