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“घुसपैठ से पहले ही अलर्ट – देखिए भारत की डिजिटल सीमा सुरक्षा की ताक़त!”

CIBMS: भारत की स्मार्ट सीमा सुरक्षा प्रणाली
मुख्य विशेषताएँ

स्मार्ट फेंसिंग: जहाँ पारंपरिक तारबंदी संभव नहीं, वहाँ CIBMS के तहत स्मार्ट फेंसिंग लगाई जाती है, जिसमें सेंसर, थर्मल कैमरे, ग्राउंड रडार, लेज़र और माइक्रो-एरोस्टैट्स लगे होते हैं।

सेंसर और कैमरा नेटवर्क: हाई-टेक सेंसर, डिटेक्टर और कैमरे चौबीसों घंटे निगरानी करते हैं, जिससे किसी भी घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चलता है।

कम्युनिकेशन सिस्टम: फाइबर ऑप्टिक केबल और सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए सभी डेटा रियल टाइम में कमांड सेंटर तक पहुँचता है।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: सभी निगरानी उपकरणों से मिली जानकारी एकीकृत कमांड सेंटर में जाती है, जहाँ से वरिष्ठ अधिकारी पूरे सीमा क्षेत्र की स्थिति देख सकते हैं और फील्ड टीमों को तुरंत निर्देश दे सकते हैं।

क्विक रिएक्शन टीम: इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के आधार पर BSF की टीमें तुरंत एक्शन के लिए तैयार रहती हैं, जिससे मैन्युअल पेट्रोलिंग की जरूरत कम होती है।

एंटी-ड्रोन और टनल डिटेक्शन: नई तकनीकों के साथ ड्रोन और सुरंगों की घुसपैठ को भी ट्रैक किया जाता है।

लक्ष्य

CIBMS का उद्देश्य मैन्युअल गश्त की जगह इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को बढ़ावा देना और सीमा सुरक्षा बल की प्रतिक्रिया क्षमता को तेज़ करना है, जिससे भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर चौबीसों घंटे स्मार्ट और सुरक्षित निगरानी सुनिश्चित हो सके

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