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संघ शताब्दी के उपलक्ष्य में संकल्प




संघ शताब्दी के उपलक्ष्य में संकल्प
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, बेंगलुरु
दिनांक : 23 मार्च 2025

विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण

अनंत काल से ही हिन्दू समाज एक प्रदीर्घ और अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण रहा है। तेजस्वी मातृशक्ति सहित संतों, धर्माचार्यों तथा महापुरुषों के आशीर्वाद एवं कर्तृत्व के कारण हमारा राष्ट्र अनेक उतार-चढ़ावों के उपरांत भी निरंतर आगे बढ़ता रहा है।

काल के प्रवाह में राष्ट्र जीवन में आए अनेक दोषों को दूर कर एक संगठित, चारित्र्यसंपन्न और सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव तक ले जाने हेतु परम पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने सन् 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारंभ किया। संघ कार्य का बीजारोपण करते हुए, डॉ. हेडगेवार ने दैनिक शाखा के रूप में व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी कार्यपद्धति विकसित की, जो हमारी सनातन परंपराओं और मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण का निःस्वार्थ तप बन गई। डॉ. हेडगेवार के जीवनकाल में ही इस कार्य ने एक राष्ट्रव्यापी स्वरूप प्राप्त कर लिया।

द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय जीवन के विविध क्षेत्रों में शाश्वत चिंतन के प्रकाश में कालसुसंगत युगानुकूल रचनाओं की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।

सौ वर्षों की इस यात्रा में संघ ने दैनिक शाखा के माध्यम से अर्जित संस्कारों के कारण समाज का अटूट विश्वास और स्नेह प्राप्त किया। इस कालखंड में संघ के स्वयंसेवकों ने प्रेम और आत्मीयता के बल पर मान-अपमान और राग-द्वेष से ऊपर उठकर सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया। संघ कार्य की शताब्दी के अवसर पर हमारा कर्तव्य है कि हम पूज्य संतों और समाज की सज्जन शक्ति, जिनका आशीर्वाद और सहयोग हर परिस्थिति में हमारा संबल बना, जीवन समर्पित करने वाले निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं और मौन साधना में रत स्वयंसेवक परिवारों का स्मरण करें।

अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते सौहार्दपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए भारत के पास अनुभवजन्य ज्ञान उपलब्ध है। हमारा चिंतन विभेदकारी और आत्मघाती प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए, चराचर जगत में एकत्व की भावना और शांति सुनिश्चित करता है।

संघ का यह मानना है कि धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन के आधार पर ही हिन्दू समाज अपने वैश्विक दायित्व का निर्वाह प्रभावी रूप से कर सकेगा। अतः हमारा कर्तव्य है कि हम –

सभी प्रकार के भेदों को नकारने वाला समरसता युक्त आचरण,

पर्यावरणपूरक जीवनशैली पर आधारित मूल्याधिष्ठित परिवार,

‘स्व’बोध से ओतप्रोत एवं नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध समाज


का चित्र खड़ा करने के लिए संकल्प लें। इसी आधार पर हम समाज के सभी प्रश्नों का समाधान तथा चुनौतियों का उत्तर देते हुए भौतिक समृद्धि एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण समर्थ राष्ट्रजीवन खड़ा कर सकेंगे।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, सज्जन शक्ति के नेतृत्व में संपूर्ण समाज को साथ लेकर, विश्व के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करने वाले समरस और संगठित भारत के निर्माण हेतु संकल्प करती है।





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