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संस्कृत तृतीय भाषा नही अनिवार्य भाषा बने – प्रो.चान्दकिरण सलूजा

संस्कृत तृतीय भाषा नही अनिवार्य भाषा बने – प्रो.चान्दकिरण सलूजा
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जोधपुर २ जुन १५।  संस्कृत भर्ती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो.चान्दकिरण सलूजा ने संस्कृतभारती जोधपुर प्रान्त के  आवासीय शिविर सञ्चालक  प्रशिक्षण वर्ग के समारोप समारोह में  अपने उध्बोधन में कहा कि संस्कृत जन जन की भाषा बने
संस्कृत मे सभी तरह का ज्ञान निहित है संगच्छध्वम् साथ चले अतिथि देवो भव
की बात संस्कृत में ही है जितनी भी समस्याएँ समाज में है वह संस्कृत से दूर
हो सकती है अत संस्कृत तृतीय भाषा नही अनिवार्य भाषा बने विश्व के लोग
संस्कृत को उत्साह के साथ सीख रहे है एक दिन संस्कृत विश्व भाषा बनेगी ।
मुख्य अतिथि आयुर्वेद विश्वविधालय के कुलपति प्रो.राधेश्याम शर्मा ने कहा कि संस्कृत वेदों की भाषा है
हमारा प्राचीन  साहित्य संस्कृत में लिखा है अत:  हमें संस्कृत सीखनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि श्रीमती नूतनबाला कपिला ने बताया कि संस्कृत संस्कारों की
भाषा है इसमें हमारा आध्यात्मिक ज्ञान निहित है । संस्कृत का प्रचार प्रसार
का काम बहुत अच्छा चल रहा है सरकारी विद्यालयों में भी शिक्षक संस्कृत को
संस्कृत के माध्यम से पढाएँ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जय नारायण व्यास विश्वविधालय के कुलपति अध्यक्ष प्रों आर.पी सिंह ने संस्कृत को भविष्य की भाषा बताया  साथ ही कहा कि संस्कृत कम्पयुटर के लिए बहुत ही उपयोगी भाषा है ।

संस्कृतभारती जोधपुर प्रान्त का आवासीय शिविर सञ्चालक प्रशिक्षण वर्ग आदर्श
विद्यामन्दिर लालसागर जोधपुर में  दिनांक 22 मई 2015 से 2 जून 2015 तक आयोजित किया गया।  समापन समारोह 1 जून 2015 शाम को हुआ जिसकी अध्यक्षता की प्रो.आर.पी.सिंह
कुलपति जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर ,मुख्यअतिथि प्रों.राधेश्याम
शर्मा कुलपति सर्वपल्लीराधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद वि.वि.जोधपुर, विशिष्ट
अतिथि श्रीमती नूतनबाला कपिला उपनिदेशिका मा.शि.वि.जोधपुर तथा मुख्यवक्ता
प्रो.चान्दकिरण सलूजा थे ।
 अतिथियों का परिचय संस्कृतभारती जोधपुरप्रान्त
के प्रान्त मन्त्री डॉ.तगसिंह राजपुरोहित ने करवाया ।तथा वृतनिवेदन
वर्गाधिकारी लीलाधर शर्मा ने किया । धन्यवाद ज्ञापन संस्कृतभारती जोधपुर
प्रान्त के अध्यक्ष प्रो.सत्यप्रकाशदुबे ने किया। 
इस वर्ग में 9 जिलो के 73
शिक्षार्थी थे  जिनको  17 शिक्षक व 15 प्रबन्धक ने प्रशिक्षण दिया ।
शिक्षार्थियों ने संस्कृत में नाटक  सम्भाषण और गीत प्रस्तुत किये । वर्ग
की व्यवस्था की जिम्मेदारी श्रवण बिश्नोई ,  संस्कृतभारती के जोधपुर महानगर
के अध्यक्ष प्रो.भानाराम ,मन्त्री लक्षमण गहलोत ,प्रान्त सम्पर्कप्रमुख
महेशदाधीच ने सम्भाली । मञ्च का सञ्चालन सवाईसिंह ने किया ।
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