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संचार साथी ऐप विवाद: सरकार का सुरक्षा दावा vs विपक्ष का जासूसी आरोप

संचार साथी ऐप दूरसंचार विभाग (DoT) की नागरिक-केंद्रित पहल है, जो 2023 में वेब पोर्टल के रूप में शुरू हुआ और जनवरी 2025 में एंड्रॉयड व iOS ऐप बनाया गया। यह ऐप मोबाइल यूजर्स को साइबर सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें खोए/चोरी फोन ट्रैकिंग, फर्जी कनेक्शन जांच, IMEI वैरिफिकेशन, स्कैम कॉल/एसएमएस रिपोर्टिंग और नाम पर रजिस्टर्ड सिम्स की जानकारी शामिल है।अब तक 5 करोड़ डाउनलोड्स के साथ 7 लाख चोरी फोन लौटाए, 3 करोड़ फर्जी कनेक्शन कटे और 37 लाख डिवाइस ब्लॉक हुए हैं।

ऐप कैसे काम करता है

ऐप खोलने पर मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP वेरिफाई करें, जो IMEI को CEIR डेटाबेस से मैच करता है। यह फोन की वैधता जांचता, नाम पर सिम्स बताता, इंटरनेशनल स्कैम कॉल रिपोर्ट करता (बिना OTP) और जागरूकता सामग्री देता है।सभी नए स्मार्टफोन्स में प्री-इंस्टॉल अनिवार्य, 90 दिनों में कंपनियों को लागू करना होगा।

सरकार के प्रमुख दावे

सरकार का कहना है कि ऐप खोए-चोरी फोन ट्रैकिंग, फर्जी कनेक्शन रोकने और स्कैम कॉल्स की रिपोर्टिंग के लिए है, जिससे 7 लाख फोन लौटे और 3 करोड़ फर्जी सिम कटे।संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि ऐप अनिवार्य नहीं, यूजर्स इसे डिलीट या न रजिस्टर कर सकते हैं। राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि मोबाइल कंपनियों से चर्चा हुई, एप्पल को छोड़कर कोई आपत्ति नहीं, और यह अन्य ऐप्स जैसा सुरक्षित है।

विपक्ष के गंभीर आरोप

विपक्ष ने ऐप को ‘पेगासस प्लस प्लस’ और ‘बिग ब्रदर’ बताते हुए असंवैधानिक ठहराया, दावा किया कि यह बातचीत की जासूसी करेगा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल ने तानाशाही का आरोप लगाया, कहा सरकार परिवार-दोस्तों की बातें सुनना चाहती है।AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने प्राइवेसी खतरे और सर्कुलर छिपाने का सवाल उठाया।विवाद के बावजूद सरकार सफाई दे रही है, लेकिन विपक्ष हंगामा जारी रखे हुए है।

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