सोवियत रूस की यात्रा और कम्युनिज्म से साक्षात्कार –
1969 में लोकसभा अध्यक्ष श्री नीलम संजीव रेड्डी की अध्यक्षता में, तथा राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल श्री बी. के. बेनर्जी के मंत्रीत्व में, भारतीय संसद के शिष्ट मंडल का सोवियत रूस जाने का कार्यक्रम तय हुआ। उस समय श्री वी. वी. गिरी राष्ट्रपति थे। श्री वी. वी. गिरी ने, इस संसदीय प्रतिनिधि मंडल में जाने के लिए श्रद्धेय दत्तोपंत जी का नाम प्रस्तावित किया। श्री वी. वी. गिरी, जो स्वयं मजदूर क्षैत्र से संबंध रहे थे, चाहते थे कि, सोवियत रूस में औद्योगिक सम्बन्धों का स्वरूप क्या है? इसका बारीकी से और निरपेक्ष भाव से अध्ययन करके, सम्यक जानकारी प्राप्त हो, क्योंकि कुछ समय बाद श्री वी. वी. गिरी भी रूस दौरे पर जाने वाले थे। 16 दिनों की सोवियत रूस की यात्रा में, उनके साथ, कम्यूनिष्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता, श्री हीरेन मुखर्जी तथा फारवर्ड ब्लॉक के श्री शिलभद्रयाजी प्रमुख थे। इस प्रतिनिधि मंडल के साथ, 16 दिनों तक सोवियत रूस तथा हंगरी की यात्रा की।

रूस यात्रा, श्रद्धेय दत्तोपंत जी के लिऐ, साम्यवाद के वास्तविक स्वरूप का बारीकी से अध्ययन करने का अपूर्व अवसर था। साम्यवादी विचारधारा का खोखलापन तथा, साम्यवादी विचारधारा के अन्तर्विरोधों का प्रत्यक्ष अनुभव करने के बाद श्रद्धेय दत्तोपंत जी ने, अथाह आत्म–विश्वासपूर्वक राष्ट्र को आश्वस्त करते हुए कहा था कि, ‘‘साम्यवाद अपने अन्तर्विरोधों के कारण, स्वतः समाप्त होने वाला है, साम्यवाद को समाप्त करने के लिए किसी को प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं है।’’ देश भर में, अपने उद्बोधनों में, श्री दत्तोपंत जी ने यह उद्घोष किया, उस समय दुनियां के आधे देशों पर लाल झंडा लहरा रहा था। कोई भी जानकार व्यक्ति ऐसी बात मानना तो दूर, सोचना भी, समझदारी नहीं मानता था, ऐसे, सटीक विश्लेषक थे दत्तोपंत जी, आज, परिणाम हम सभी के सामने है।
दत्तोपंत जी की चीन यात्रा –
3 अप्रेल से 19 अप्रेल 1985 को, ऑल चायना फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियन्स के निमंत्रण पर, श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी के नेतृत्व में, भारतीय मजदूर संघ का प्रतिनिधि मंडल चीन यात्रा पर गया। प्रतिनिधि मंडल में,श्री मनहर भाई मेहता, श्री रास बिहारी मैत्र, श्री वेणुगोपाल, और श्री ओम प्रकाश अग्धी शामिल थे। 17 दिवसीय चीन यात्रा के दौरान, दत्तोपंत जी ने, चीन, के समाज जीवन, औद्योगिक सम्बन्धों, मजदूर संगठनों, राज्य व्यवस्था का अत्यन्त बारीकी से अध्ययन किया। यात्रा के दौरान, चीन के मजदूर नेताओं, प्रसासनिक अधिकारियों, कम्यूनिष्ट पार्टी के नेताओं से विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधि मंडल के विदाई के अवसर पर, चीन रेडियो द्वारा, श्रद्धेय दत्तोपंत जी का विदाई संदेश रिकार्ड किया गया, जो 28अप्रेल 1985 को सार्वजनिक रूप से प्रसारित चीन यात्रा के पश्चात, अपने देश व्यापी प्रवास के दौरान, अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि, ‘‘चीन में, केवल नाम मात्र के लिए कम्यूनिज्म है, चीन, कम्यूनिज्म छोड़ चुका है।’’ उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता प्रकट की , कि, चीन के ट्रेड यूनियन्स ने, बी. एम. एस. की कार्यप्रणाली का व्यापक अध्ययन करने के बाद, हमें निमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि, बी. एम. एस. की त्रिसूत्री, ‘‘राष्ट्र का औद्यौगिकिकरण, उद्यौगों का श्रमिकीकरण, और श्रमिकों का राष्ट्रीयकरण, ’’ की सभी ने प्रसंशा की।
–डॉ रणजीत सिंह जोधपुर
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