परम पूज्य श्री गुरुजी की इच्छा और मजदूर क्षैत्र में प्रवेश –
1949 में ही परम पूजनीय श्री गुरूजी ने, श्रद्धेय दत्तोपंत जी को, मजदूर क्षेत्र का अध्ययन करने को कहा। इस प्रकार दत्तोपंत जी के जीवन में एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ। ऐसा लगता है, मानो, मजदूर आन्दोलन दत्तोपंत जी के लिये ईश्वर प्रदत कार्य था। विद्यार्थी परिषद के जन-जागरण कार्यक्रमों के दौरान, कांग्रेस से सम्बन्धित, इण्डियन नेशनल ट्रेड युनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष श्री पी. वाय. देशपाण्डे जी से अच्छा सम्पर्क आया था। उसी का लाभ लेते हुए दत्तोपंत जी ने इंटक में प्रवेश किया। अपनी प्रतिभा और संगठन कौशल के बल पर थोड़े समय में ही इंटक से सम्बधित नो युनियनों ने, श्रद्धेय ठेंगड़ी जी को, अपना पदाधिकारी बना दिया। अक्टुबर 1950 में, श्री दत्तोपंत जी को इंटक की राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनाया गया तथा साथ ही तत्कालीन मध्य प्रदेश के इंटक के प्रदेश संगठन मंत्री चुने गये। श्रद्धेय दत्तोपंत जी, कहते थे – ‘‘पूजनीय श्री गुरूजी का यह आग्रह था कि, केवल इंटक की कार्यपद्धति जानना प्रर्याप्त नहीं है। कम्यूनिस्ट यूनियन्स और सोशलिस्ट यूनियन्स की कार्य पद्धति भी जाननी चाहिये।”
श्रद्धेय दत्तोपन्त जी ने इस दिशा मे प्रयत्न प्रारंभ किये और 1952 से 1955 के कालखंड में श्री दत्तोपंत जी, कम्युनिस्ट प्रभावित ‘‘ऑल इण्डिया बैंक एम्पलाइज एसोशियेशन’’ (AIBEA) नामक मजदूर संगठन के प्रांतीय संगठन मंत्री रहे। 1954 से 55 में आर. एम. एस. एम्पलॉइज युनियन नामक पोस्टल मजदूर संगठन के वे सेन्ट्रल सर्कल (अर्थात् आज का मध्यप्रदेश, विदर्भ, और राजस्थान) के अध्यक्ष इसी कालखंड में (1949 से 1955) श्री ठेंगड़ी जी ने कम्युनिज्म का गहराई से अध्ययन किया। कम्युनिज्म के तत्व ज्ञान और कम्युनिस्टों की कार्य पद्धति आदि विषयों पर पूज्य श्री गुरूजी से वे रात के कई घंटों तक विस्तृत चर्चा किया करते थे। (शून्य से सृष्टि तक पृ. स. 14-15)
–डॉ रणजीत सिंह जोधपुर
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