विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में दिए एक महत्वपूर्ण वक्तव्य में कहा कि अनिश्चित और अशांत वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए सबसे आवश्यक है कि वह पूरी मजबूती के साथ अपने पैरों पर खड़ा रहे। उनके अनुसार ‘आत्मनिर्भरता’ केवल वैश्विक उथल-पुथल से निपटने का एक दृष्टिकोण ही नहीं है, बल्कि यह हमारे आत्मविश्वास को मजबूत करने, हमारी लचीलापन क्षमता को बढ़ाने और विकसित भारत की नींव रखने का आधार भी है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत कोई साधारण राष्ट्र नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत राज्य है—एक ऐसी समाज व्यवस्था जिसने समय की कठिनतम परीक्षाओं को पार करते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को सहेजकर रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की असली ताकत उसके लोग और उनका आत्मविश्वास है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों पर काबू पाया और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ते हुए अनेक चुनौतियों का समाधान किया।
विदेश मंत्री के अनुसार, भारत के पास गर्व करने के लिए बहुत कुछ है और दुनिया के साथ साझा करने के लिए भी अनगिनत बातें हैं। उन्होंने कहा कि खुलेपन और वैश्विक सहभागिता के युग में हम लाभ अवश्य उठाएं, लेकिन इस समय की अनिश्चितता और अस्थिरता में सबसे पहली ज़रूरत है कि हम आत्मनिर्भर बनें और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करें।
Pleased to address @TourismFaith Conclave 2025 and speak on Indian Tourism – its potential, growth and the invincible spirit driving it forward.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 13, 2025
Appreciated the contributions of the sector in evoking & strengthening our cultural pride, energising the economy and in… https://t.co/eOQqpJyN2N pic.twitter.com/eid90QvO2T
‘आत्मनिर्भरता’ के बारे में डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है, बल्कि यह एक मानसिकता है — ऐसी सोच जो हमें किसी भी वैश्विक संकट, आपूर्ति श्रृंखला में टूट, तकनीकी युद्ध या भू-राजनीतिक संघर्ष जैसे हालातों में भी मजबूती से खड़ा रखे। यह वही सोच है जो हमें घरेलू नवाचार, स्थानीय उद्योगों की मजबूती, तकनीकी निवेश और मानव संसाधन विकास की दिशा में प्रेरित करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) बनाने की यात्रा केवल बुनियादी ढांचा, औद्योगिक उत्पादन और व्यापार सुधारों से नहीं पूरी होगी, बल्कि इसके लिए समाज में आत्मसम्मान, सांस्कृतिक गर्व और दीर्घकालिक दृष्टिकोण की ज़रूरत है। जब देश का हर नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी समझेगा, तब ही आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना साकार होगा।
डॉ. जयशंकर के इस वक्तव्य ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में भारत की विदेश नीति, आर्थिक रणनीतियां और आंतरिक सुधार ‘आत्मनिर्भरता’ को केंद्र में रखकर तैयार होंगे। यह विचार केवल एक नारा नहीं, बल्कि 21वीं सदी में भारत की वैश्विक पहचान और नेतृत्व की कुंजी है।
#WATCH | Delhi: EAM Dr S Jaishankar says, "…it is essential in times of unpredictability to stand firmly on our own feet. Atmanirbharta is, of course, the mindset to deal with global turbulence. But it is also the basis to strengthen our self-confidence, to increase our… pic.twitter.com/zLSauWmUj5
— ANI (@ANI) August 13, 2025