हाल ही में पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री या सुरक्षा अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि बलूचिस्तान प्रांत पर अब पूरी तरह से पाकिस्तान का नियंत्रण नहीं है।
यह बयान बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा, अलगाववादी गतिविधियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच आया है।
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यहां बलूच अलगाववादी संगठन, जैसे बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), पाकिस्तानी सेना और सरकारी प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
हाल के महीनों में बलूच विद्रोहियों ने कई जिलों में प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने का दावा किया है। कई इलाकों में पाकिस्तानी झंडे हटाकर बलूच झंडे फहराए गए हैं।
पाकिस्तान की सेना और अर्धसैनिक बलों को भी कई बार पीछे हटना पड़ा है या भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से इतनी बड़ी कमजोरी मानी है।
इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को बड़ा झटका लगा है और बलूच आंदोलन को नैतिक समर्थन मिला है।
साथ ही, इससे चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (CPEC) जैसी परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भारत लंबे समय से बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन और पाकिस्तान के दमनकारी रवैये को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
पाकिस्तान की यह स्वीकारोक्ति भारत के लिए कूटनीतिक बढ़त का मौका है।