भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2025 में विदेशी मुद्रा (डॉलर) बाजार में ऐतिहासिक हस्तक्षेप करते हुए कम से कम $5 अरब अमेरिकी डॉलर बेचने का ऑपरेशन चलाया। यह कदम ऐसे समय पर आया, जब अमेरिका द्वारा भारत पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) थोपे जाने से भारतीय रुपया रिकॉर्ड स्तर तक कमजोर हो गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों और “डेड इकॉनमी” की धमकी के बीच RBI ने सक्रियता दिखाते हुए कृत्रिम रूप से डॉलर सप्लाई बढ़ाकर रुपये को बचाया।
डॉलर की 1973 के बाद सबसे बड़ी गिरावट
इस कदम का असर इतना तीव्र था कि अमेरिकी डॉलर 1973 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट का गवाह बना। भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले ने न केवल भारतीय बाजार में डॉलर की कीमत में भारी गिरावट पैदा की, बल्कि वैश्विक स्तर पर डॉलर के प्रभुत्व को भी चुनौती दी। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, एक्सचेंज ट्रेडर्स और वैश्विक अर्थशास्त्रियों में यह खबर चर्चा का मुख्य विषय बन गई।
रुपये की बढ़ती ताकत: इंटरनेशनलाइज़ेशन
इस डॉलर सेल ऑपरेशन के बाद RBI ने रुपये को वैश्विक व्यापार में और अधिक अपनाने की नीति पर ज़ोर दिया—रूस, सऊदी अरब, अफ्रीकी देशों और ASEAN मार्केट्स में भारत ने नया लोकल करंसी पेमेंट सिस्टम शुरू किया। अब भारत के तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और फार्मा जैसे बड़े एक्सपोर्ट डील्स सीधे रुपये में हो रहे हैं, जिससे रुपये को ‘regional trade currency’ का दर्जा मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर सेल के साथ-साथ रुपया इंटरनेशनलाइजेशन को सरकार की नई ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ आर्थिक नीति से जोड़ दिया है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं: अमेरिकी बाजार और ट्रंप प्रशासन में हलचल
डॉलर सेल ऑपरेशन और रुपये की अंतरराष्ट्रीयरण नीति ने अमेरिकी प्रशासनों के आर्थिक रणनीतिकारों को चौंका दिया। अमेरिकी शेयर बाजार, वित्तीय संस्थान और बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया, क्योंकि भारत के इस कदम से डॉलर के मुकाबले कई एशियाई और अफ्रीकी करेंसी मज़बूत हुईं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के इस कदम को “अप्रत्याशित और आक्रामक” बताया, साथ ही चेतावनी दी कि आगे भारत को व्यापार और निवेश में और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की नई रणनीति
RBI ने इस महीने अब तक $5 अरब से ज्यादा डॉलर बेचने के साथ-साथ ‘जोखिम-रहित विदेशी मुद्रा भंडार’ की नीति अपनाई है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत है, विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर है और रुपया 11 महीने तक के आयात को कवर करने में सक्षम है। रिजर्व की मजबूती से RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में तगड़ा हस्तक्षेप करने और रुपये को सपोर्ट करने की छूट मिली.
RBI के $5 अरब डॉलर सेल ऑपरेशन और भारत द्वारा रुपये की इंटरनेशनलाइज़ेशन रणनीति ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार में शक्ति दी, बल्कि डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को भी पहली बार जमीनी चुनौती दी। यह ऐतिहासिक घटना भारतीय मुद्रा नीति, वैश्विक व्यापार और डॉलर आधारित वित्तीय सिस्टम में नए संतुलन का संकेत देती है।
डॉलर को जोरदार झटका: RBI ने बेचे $5 अरब, रुपये की अंतरराष्ट्रीयकरण की तेजी—1973 के बाद डॉलर की सबसे बड़ी गिरावट
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Mayank Kansara
- 13 August 2025
- 10:02 am