Vsk Jodhpur

गुरु व्यक्ति नहीं, तत्व है

भारतीय संस्कृति में “गुरु” केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतन तत्व है—एक सिद्धांत, एक दृष्टिकोण, जो जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन करता है। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार और ‘रु’ का अर्थ है उसे दूर करने वाला। अतः गुरु वह है जो अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। इसीलिए गुरु का स्थान माता-पिता और देवताओं से भी ऊपर माना गया है।

images 82093785978039147125

भारत में हजारों वर्षों से व्यास भगवान, शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, समर्थ गुरु रामदास, स्वामी विवेकानंद जैसे महान गुरु हुए हैं, जिन्होंने समाज को आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक दिशा दी। करोड़ों लोगों ने अपने-अपने जीवन में श्रद्धा और विश्वास से किसी न किसी गुरु को अपनाया है। यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी। अपने-अपने गुरु के चरणों में समर्पित होकर लोग केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, जीवन की दिशा और उद्देश्य प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि चाहे हमारे समाज पर कितने भी विदेशी आक्रमण हुए हों, कितनी भी आपदाएं आई हों, हमारी संस्कृति और राष्ट्र जीवन अब भी जीवित है।

images 57138128999144219472

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस गूढ़ तत्व को समझते हुए अपने गुरु स्थान पर किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भगवाध्वज को प्रतिष्ठित किया है। यह ध्वज किसी व्यक्ति की महिमा का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समर्पण, और अखंड प्रेरणा का प्रतीक है। यह सूर्य के केसरिया रंग से प्रेरित है, जो स्वयं जलकर संसार को प्रकाश देता है। जैसे साधु-संत भगवा वस्त्र पहनते हैं, वैसे ही यह ध्वज त्याग और सेवा भावना का प्रतिनिधि है।

images 45536456582189555107

भगवाध्वज स्थूल नहीं, बल्कि सूक्ष्म चेतना का प्रतीक है। यह ध्वज हमारे राष्ट्र जीवन का साक्षी है। यह न किसी समय विशेष से जुड़ा है, न किसी व्यक्ति से—बल्कि यह सनातन मूल्यों का प्रतीक है। यह ध्वज हमें निरंतर प्रेरित करता है कि हम व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए जियें।

images 25762628038165398610

इसलिए संघ में इसे “गुरु” का स्थान दिया गया है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा गुरु वह है जो किसी पद, व्यक्ति या सीमाओं से परे हो। गुरु वह है जो निरंतर प्रेरणा देता है, जो एक विचार बनकर जीवन को दिशा देता है। यही गुरु तत्व हमें जोड़ता है, सजग करता है, और राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर करता है।

अतः गुरु केवल शरीरधारी नहीं, बल्कि एक अनंत तत्व है—जो समय, स्थान और व्यक्ति से परे, सदैव हमारे भीतर जागृत रहता है। यही गुरु तत्व ही हमारी शक्ति का मूल है।

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives

Recent Stories

Scroll to Top