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सात हजार पाक विस्थापितों को नागरिकता का इंतजार

patrika22092012

सात हजार पाक विस्थापितों को नागरिकता का इंतजार


 

जोधपुर। पाकिस्तान में उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आए सात हजार
लोग नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पांच हजार
विस्थापित अकेले जोधपुर में हैं। सरकार ने अब इनकी नागरिकता के लिए जिला
प्रशासन को आवेदन भरवाकर कर भिजवाने के निर्देश दिए हैं। ये विस्थापित
पाकिस्तान से थार एक्सप्रेस व अन्य माध्यमों से समय-समय पर भारत आते रहे
हैं। फारेनर रजिस्ट्रेशन अधिकारी और विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े
सीमांत लोक संगठन के अनुसार कुल सात हजार पाक विस्थापित बिना नागरिकता के
रह रहे हैं। इनमें जोधपुर शहर में पांच हजार विस्थापित हैं। शेष्ा जैसलमेर,
बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, पाली, जालोर, सिरोही और कुछ अजमेर व जयपुर
मे रह रहे हैं।

2005 में मिली थी नागरिकता

विस्थापितों के
पुनर्वास से जुड़े सीमांत लोक संगठन के अनुसार वर्ष 2005 में जोधपुर में
पाक विस्थापितों को नागरिकता प्रदान करने के लिए शिविर लगाया गया था। इसमें
पूरे राजस्थान से 13 हजार विस्थापितों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई।
इनमें जोधपुर में रहने वाले पांच हजार पाक विस्थापितों को भी नागरिकता
मिली। सूत्रों की मानें तो उस समय तक विस्थापितों को नागरिकता प्रदान करने
का अधिकार जिला कलक्टर के हाथ में था, लेकिन इसके बाद ये अधिकार केन्द्र
सरकार ने वापस ले लिए। अब केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से ही नागरिकता
प्रदान की जाती है।
विस्थापितों से नागरिकता आवेदन लेने की सतत
प्रक्रिया है। जो पाक विस्थापित सात साल से यहां रह रहे हैं, उनके आवेदन हम
गृह मंत्रालय को आगे भेजते हैं। बाद में गृह मंत्रालय की ओर से मिले
निर्देशों के अनुसार काम किया जाता हैं।
– रमेश कुमार जैन, संभागीय आयुक्त, जोधपुर।
सात
साल से रह रहे पाक विस्थापितों के मामले में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने
डेढ माह पहले ही नागरिकता के आवेदन मांगे हैं। उन्हें भरकर भिजवाया जा रहा
है।
-सिद्धार्थ महाजन, कलक्टर, जोधपुर
यह है नागरिकता की प्रक्रिया
पाकिस्तान
से लोग धार्मिक, भ्रमण और व्यावसायिक वीजा पर भारत पहुंचते हैं। धार्मिक
और व्यावसायिक वीजा एक-एक माह के लिए और भ्रमण वीजा तीन माह के लिए मिलता
है। जो व्यक्ति वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते वे पुलिस विभाग (सतर्कता)
के फॉरेनर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एफआरओ) के यहां स्थाई वास की अनुमति के लिए
आवेदन करते हैं। यहां से पूरी जांच कर उनका आवेदन गृह मंत्रालय को भेजा
जाता है। प्रारम्भिक तौर पर उनकी छह माह की वीजा अनुमति बढ़ा दी जाती है।
इसी अवधि में दुबारा आवेदन कर छह माह, एक साल और उसके बाद दो-दो साल की
अनुमति दी जाती है। यहां सात साल नियमित रहने पर उन्हें भारत की नागरिकता
दी जाती है। बच्चों से बड़ों तक अलग-अलग श्रेणी के लिए तीन हजार रूपए से
बीस हजार रूपए तक नागरिकता फीस है।

श्यामवीर सिंह

स्त्रोत: http://www.patrika.com/news.aspx?id=९०५१५८

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