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मुंबई ट्रेन हादसे के बाद रेलवे ने गैर-एसी ट्रेनों में ऑटोमेटिक दरवाजा बंद करने की सुविधा पर विचार शुरू किया

मुंबई के दिवा और कोपर स्टेशनों के बीच सोमवार, 9 जून 2025 को हुए भीषण ट्रेन हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। इस हादसे में कम से कम चार यात्रियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए, जो दो स्थानीय ट्रेनों के दरवाजों पर लटके हुए थे और ट्रेनों के बीच टकराव के बाद पटरी पर गिर गए।

रेलवे मंत्रालय और रेलवे बोर्ड ने इस घटना के बाद गैर-एसी स्थानीय ट्रेनों में ऑटोमेटिक दरवाजा बंद करने की सुविधा लगाने पर गंभीरता से विचार किया है। अब तक, ऑटोमेटिक दरवाजे की सुविधा सिर्फ एसी ट्रेनों में ही थी, लेकिन इस हादसे के बाद रेलवे ने सभी नई और मौजूदा गैर-एसी ट्रेनों में भी इस तकनीक को लगाने का फैसला किया है।

इस नए डिजाइन में कई बदलाव किए जाएंगे, ताकि ट्रेनों में हवा का प्रवाह कम न हो। इनमें दरवाजों पर लूवर्स, छत पर वेंटिलेशन यूनिट और कोच के बीच वेस्टिब्यूल शामिल हैं, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकेंगे और भीड़ को संतुलित किया जा सकेगा। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस नई डिजाइन की पहली ट्रेन नवंबर 2025 तक तैयार हो जाएगी और जनवरी 2026 तक सेवा में शामिल कर दी जाएगी।

इसके अलावा, मुंबई सबअर्बन रेलवे के लिए 238 एसी ट्रेनों का निर्माण भी जारी है, जिनमें ऑटोमेटिक दरवाजे पहले से ही लगे होंगे। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे ट्रेनों के दरवाजों पर लटकने या फुटबोर्ड पर यात्रा करने से बचें, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे की जांच का आदेश दिया है और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का भी आश्वासन दिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर मुंबई की स्थानीय ट्रेनों में यात्री सुरक्षा और भीड़भाड़ की समस्या को उजागर किया है। रेलवे प्रशासन का यह नया कदम भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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