जब जब अपने को भूले तब-तब हारे – सरसंघचालक डा. मोहनराव जी भागवत राणा सांगा स्मारक विदेशी आक्रांता के बनाए बुलंद दरवाजे का जवाब – डा. मोहनराव जी भागवत
सम्पूर्ण समाज एक करना, गुण सम्पन्न, संगठित समाज देश के भाग्य परिवर्तन की मूलभूत आवश्यकता है -परम् पूजनीय सरसंघचालक
विख्यात पत्रकार जिलानी के साथ श्री गुरूजी का साक्षात्कार– न्यायोचित माँगें पूरी की जानी चाहिये, पर जब चाहे विशेषाधिकारों की माँग कतई न्यायोचित नहीं : श्री गुरूजी