शाखा के माध्यम से स्वयंसवेको में एकात्मक भाव को जाग्रत कर राष्ट्र भक्ति के गुणो का विकास किया जाता है – मुरलीधर जी
प.पू. सरसंघचालक डाॅ. श्री मोहन जी भागवत के श्री विजयादशमी उत्सव 2015 के अवसर पर दिये गये उद्बोधन का सारांश