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1200 साल पहले के हिंदुत्व के प्रभाव पर मंथन

1200 साल पहले के हिंदुत्व के प्रभाव पर मंथन

Mathura | Last updated on: April 5, 2013 5:30 AM IST


वृंदावन। पांच साल बाद मिले हैं सो अमेरिका से लेकर श्रीलंका तक के अनुभव साझा करने में चेहरे पर वहां का सार भाव उतर आता है। वृंदावन के केशवधाम में हिंदू स्वयंसेवक संघ के चिंतन शिविर के दूसरे दिन पहले दिन की बात ही आगे बढ़ी। 1200 साल पहले हिंदुत्व का प्रभाव अद्भुत था। इसलिए दृढ़ इच्छा शक्ति से वही दृश्य दोहराया जा सकता है। अपने-अपने कार्यक्षेत्र वाले मुल्कों में आ रही दिक्ततों और उससे पार पाने के अनुभव दूसरे दिन विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने साझा किए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने बड़े ध्यान से सबके विचारों को सुना।
सूत्रों ने बताया कि हिंदू संस्कृति को ओर दुनिया के बढ़ते झुकाव के बीच इस पर सकारात्मक कार्य करते हुए कैसे आगे बढ़ाया जाए इस पर विचार विमर्श हुआ। सन 712 ई. के पूर्व हिंदू संस्कृति अत्यंत प्रभावी थी। इसे मूलमंत्र मानकर दुनिया भर में हिंदू संस्कृति के विस्तार की बात भी की गई। चिंतन इस बात पर भी हुआ कि किन देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधियों का कार्य करने में क्या-क्या दिक्कतें आईं। साथ ही प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कैसे उन्होंने बाधाएं पार करके संस्कृति का प्रसार किया। प्रतिनिधियों ने काफी वक्त तक अपने अपने अनुभव बांटे। इस दौरान संघ के सह सरकार्यवाह सुरेशजी सोनी, होसबले दत्तात्रेय, कन्ननजी, केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मदनदासजी उपस्थित रहे। शिविर में हिंदुओं की दुनिया के विभिन्न देशों में स्थिति पर चर्चा हुई। विश्व भर में हिंदुओं को संगठित करने को लेकर भी चर्चा की गई।
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आज निकलेगा चिंतन का निष्कर्ष
वृंदावन। हिंदू स्वयंसेवक संघ के चिंतन शिविर में लगातार दो दिनों तक मलेशिया, लंका, जर्मनी, कनाडा आदि देशों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव सुनाए। अब आज इस चिंतन शिविर का निष्कर्ष निकलेगा। आज संघ के सर कार्यवाह मोहन भागवत अपने विचार रख सकते हैं।
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40 प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
चिंतन शिविर के दूसरे दिन 40 प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। केशवधाम में पहुंचे कई प्रमुख प्रतिनिधि जो आरएसएस के पदाधिकारी थे वह दोपहर बाद फरह के गण शिक्षक अभ्यास वर्ग में शामिल होने के लिए चले गए। इधर विदेशी प्रतिनिधियों और संघ के शीर्ष नेतृत्व का चिंतन होता रहा।
स्त्रोत: http://www.amarujala.com/news/states/uttar-pradesh/mathura/Mathura-57182-2/
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