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हिमालयी सुरक्षा को बड़ा बल: भारत ने BEL के साथ 1,950 करोड़ रुपये की माउंटेन रडार डील साइन की

हिमालयी सुरक्षा को बड़ा बल: भारत ने BEL के साथ 1,950 करोड़ रुपये की माउंटेन रडार डील साइन की

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2026: भारत ने ऊंचाई वाले और संवेदनशील सीमाई इलाकों में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ 1,950 करोड़ रुपये की डील के तहत दो अत्याधुनिक माउंटेन रडार सिस्टम खरीदने का समझौता किया है। ये रडार भारतीय वायुसेना को पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर ज्यादा प्रभावी निगरानी, तेज़ पहचान और बेहतर एयर-डिफेंस प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएंगे।

रिपोर्टों के मुताबिक यह सौदा Buy (Indian-IDDM) श्रेणी के तहत किया गया है, यानी यह स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण पर आधारित है। इन रडारों को DRDO की Electronics and Radar Development Establishment (LRDE) ने डिजाइन और विकसित किया है, जबकि निर्माण BEL करेगा।

क्या है डील

रक्षा मंत्रालय ने दो माउंटेन रडार, उनसे जुड़े उपकरणों और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यह करार किया है। मंत्रालय के अनुसार इनकी स्थापना और कमीशनिंग से भारत की एयर डिफेंस क्षमता मजबूत होगी और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता भी घटेगी।

रिपोर्टों के अनुसार ये रडार विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों के लिए बनाए गए हैं जहां भू-भाग ऊंचा, दुर्गम और ऑपरेशनल चुनौतियों से भरा होता है। इनमें निगरानी करना सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है, इसलिए यह प्रणाली सीमा सुरक्षा में बड़ी कमी को भरने का काम करेगी।

कहां लगाए जा सकते हैं

सूत्रों के अनुसार इन रडारों की तैनाती गुलमर्ग और नागालैंड के पफुत्सेरो जैसे क्षेत्रों में होने की संभावना है, ताकि उत्तर और उत्तर-पूर्वी सीमा की संवेदनशील पट्टियों पर निगरानी मजबूत की जा सके। ये इलाके रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां भू-भाग की वजह से रडार कवरेज और त्वरित पहचान अक्सर चुनौती बन जाते हैं।

क्यों अहम है यह कदम

हिमालयी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हवाई निगरानी हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। दुश्मन की उड़ान, घुसपैठ, ड्रोन गतिविधि या हवाई खतरे का समय रहते पता लगाना सीमाई सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होता है। माउंटेन रडार ऐसे ही दुर्गम इलाकों में एयरस्पेस पर बेहतर पकड़ देते हैं और वायुसेना की स्थिति-समझ को मजबूत करते हैं।

यह डील भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है जिसमें देश स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देकर लंबी अवधि की सामरिक स्वायत्तता हासिल करना चाहता है।

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

यह सौदा सिर्फ एक खरीद नहीं, बल्कि Aatmanirbhar Bharat और Make in India नीति का भी बड़ा उदाहरण है। रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस तरह के स्वदेशी कार्यक्रमों से न केवल सेना की क्षमता बढ़ती है, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलता है।

BEL जैसे सार्वजनिक उपक्रम और DRDO जैसी संस्थाएं मिलकर ऐसी तकनीकें विकसित कर रही हैं, जो भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर कम निर्भर बनाती हैं। यह दीर्घकाल में न सिर्फ लागत घटाएगा, बल्कि सप्लाई चेन जोखिम भी कम करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका

इन रडारों के आने से भारतीय वायुसेना को पहाड़ी सीमाओं पर बेहतर प्रारंभिक चेतावनी, निगरानी और प्रतिक्रिया समय मिलेगा। इससे न केवल सैन्य तैयारी मजबूत होगी, बल्कि आपात स्थिति में निर्णय लेने की गति भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बढ़ती चुनौतियों, विशेषकर उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में, इस तरह की तकनीक अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य हो गई है। यही कारण है कि यह डील रक्षा आधुनिकीकरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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