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घुसपैठ, हिन्दू विस्थापितों के पुनर्वास, तस्करी, सीमा क्षेत्र में बढ़ रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और जासूसी जैसे विषयों पर गहराई से चिंतन

सीमा जागरण संगठनों कि दो दिवसीय बैठक जोधपुर के शहीद राम-शरद कोठारी भवन खेतनादि में संपन्न हुई जिसमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारणी के सदश्य श्री इंद्रेश कुमार ने प्रतिभागियों से देश कि सीमाओं कि सुरक्षा और जन सामान्य को सुदृढ़ सीमा के लिए सिद्ध रहने कि आवश्यकता पर बल दिया। 
दो दिन चली इस बैठक में देश कि अंतरष्ट्रीय जमीनी सीमा से लगे हुए १२ राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सीमा संगठनों कि गतिविधयों के जानकारी एकत्र कर आगामी कार्य योजना बनायीं गयी। श्री इंद्रेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में यवाओं में परंपरागत भारतीय खेलों का प्रचलन बढे, उनको भागीदारी सुरक्षा बालों में भी अधिकतम हो। श्री इंद्रेश कुमार ने प्रतिभागियों से यह भी आग्रह किया कि आगामी आम चुनाव देश में लोकतंत्र का बड़े महा यज्ञ के रूप में हो रहे हैं अतः सभी देशवासियों को इसमे आहुति देने के लिए तैयार होना चाहिए। अधिकतम मतदान हो, मतदान जाति, पंथ, भाषा, मजहब या क्षेत्रवाद के आधार पर नहीं देश के हित में देश सुरक्षा, स्वावलम्बन और विकास के आधार पर हो यह विचार लेकर जन सामान्य के बीच जाना चाहिए। 
बैठक में सीमा जागरण संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री राकेश कुमार ने सीमा संगठनों कि अपने सीमा क्षेत्रों में भूमिका को और भी प्रभावी बनाने के लिए अधिकतम ग्रामों तक संपर्क कार्य योजना पर बल दिया। 
सीमाजन कल्याण समिति राजस्थान के प्रदेश महामंत्री बंशीलाल भाटी ने जानकारी दी कि दो दिवसीय बैठक में १२ राज्यों के कुल ३८ प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने प्रदेश में सीमावर्ती क्षत्रों कि समश्याओं और उनसे से निराकरण के लिए किये जा रहे प्रयत्नों के सम्बन्ध में अनुभव आपस में बांटे। प्रतिभागियों ने घुसपैठ, हिन्दू विस्थापितों के पुनर्वास, तस्करी, सीमा क्षेत्र में बढ़ रही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और जासूसी जैसे विषयों पर गहराई से चिंतन किया। 
समिति के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल ठाकुर ने जानकारी दी कि सीमा क्षेत्र में किसानो को कृषि कार्य करने में आने वाली परिस्तिथियों के निराकरण के लिए सरकार को ज्ञापन देकर समश्याओं का निराकरण का प्रयत्न किया जाएगा। 
बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि देश कि सीमायें अब और न कटेगी न घटेगी इसके लिए सम्पूर्ण शक्ति लगा कर संगठन को सक्रीय करेंगे। 
उल्लेखनीय है कि देश के सीमा क्षेत्रों में राष्ट्रवादी गतिविधयों को बढ़ने और सुरक्षा बालों को समर्थन और सहयोग देने वाला सीमाजन बनाने के लिए १९८५ में जोधपुर में ही सबसे पहले सीमा संगठनों कि स्थापना कि गयी थी जो आज देशव्यापी स्वरुप के साथ प्रभावी भूमिका में कार्यरत है।
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