ईरान संघर्ष अपने 29वें दिन में प्रवेश कर चुका है। जो शुरू में क्षेत्रीय टकराव था, वह अब व्यापार, बाजारों और वैश्विक गठबंधनों को हिला रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों से लेकर अमेरिकी नौसेना की तैनाती तक, घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हम आपको 10 क्रिटिकल डेवलपमेंट्स बता रहे हैं, जिनमें भारत का संदर्भ और विशेषज्ञ विश्लेषण भी शामिल है।
1. हूती हमले का नया दौर: सुबह यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए। दोनों को रोक लिया गया, लेकिन चेतावनी साफ थी। हूतियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी, जो वैश्विक तेल का 12% और कंटेनर व्यापार का 25% संभालता है। इससे होर्मुज जलसंधि पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा।
2. ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड्स की धमकी: ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अमेरिका से जुड़े खाड़ी विश्वविद्यालयों पर हमले की चेतावनी दी, अगर ईरानी शैक्षणिक संस्थानों पर हमले जारी रहे। 30 मार्च की डेडलाइन के साथ NYU अबू धाबी और नॉर्थवेस्टर्न कतर जैसे संस्थान सुरक्षित नहीं।
3. अबू धाबी पर मिसाइल हमला: ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों ने अबू धाबी के एक प्रमुख एल्युमीनियम स्मेल्टर को निशाना बनाया – दुनिया का सबसे बड़ा। इससे ऊर्जा से आगे औद्योगिक सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
4. वैश्विक बाजारों में हाहाकार: S&P 500 पांचवें हफ्ते गिरावट की ओर, चार सालों में सबसे लंबी। नैस्डैक करेक्शन मोड में। तेल $110 प्रति बैरल पर, महंगाई और वैश्विक विकास पर ब्रेक।
5. होर्मुज में सीमित राहत: ईरान ने 20 पाकिस्तानी जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया। यह कूटनीतिक इशारा है, लेकिन सामान्य ट्रैफिक के मुकाबले नगण्य।
6. कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला: ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंकों को नुकसान पहुंचाया, आग लगी और रडार सिस्टम प्रभावित। कुवैत ने सैकड़ों मिसाइलें रोकीं।
7. अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी: यूएसएस ट्रिपोली (2,500 मरीन सहित) और यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश क्षेत्र में पहुंचे। वॉशिंगटन का रुख स्पष्ट: पीछे हटना नहीं।
8. ट्रंप का बयान: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में 3,500 से अधिक टारगेट बाकी हैं। उन्होंने NATO को अप्रभावी बताया, पश्चिमी गठबंधन में दरारें उजागर।
9. 11,000 हमलों का आंकड़ा: यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से 11,000 हमले ईरान पर। ईरान के भारी नुकसान के बावजूद हमले जारी।
10. वैश्विक संकट की पुष्टि: यह अब क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि वैश्विक संकट है।
भारत का संदर्भ: तेल संकट और क्षेत्रीय खतरा
भारत पर प्रभाव गहरा है। 85% तेल आयात खाड़ी से होने के कारण $110 तेल मूल्य से पेट्रोल-डीजल ₹110-120 प्रति लीटर पहुंच सकता था, लेकिन सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को 0 या 3 रुपये करके इसका प्रभाव जनता तक पहुंचने से रोक दिया। होर्मुज और बाब अल-मंदेब बंद होने से ₹50,000 करोड़ का दैनिक व्यापार प्रभावित। रिलायंस और ONGC जैसी कंपनियां स्टॉक पाइल बढ़ा रही हैं। विदेश मंत्रालय ने 10 लाख भारतीयों को खाड़ी से निकालने की योजना बनाई। रक्षा मंत्रालय ने INS विक्रांत को अरब सागर में तैनात किया। विशेषज्ञ कहते हैं, भारत को रूस और अमेरिका से वैकल्पिक तेल स्रोत तलाशने होंगे।
वैश्विक विशेषज्ञों के आकलन
CSIS के ब्रूस क्लॉफर ने कहा, “ईरान संघर्ष तेल से आगे सप्लाई चेन को निशाना बना रहा है। भारत जैसे आयातक देशों को 6 महीने का स्टॉक जरूरी।” इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की प्रीति पटेल ने चेताया, “हूती-ईरान गठजोड़ से भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में। QUAD को सक्रिय करना होगा।” ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के साजिद जफरी बोले, “ट्रंप की NATO आलोचना से भारत को स्वतंत्र रणनीति अपनानी चाहिए।”