पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर लंपी स्किन डिज़ीज़ (LSD) ने दस्तक दे दी है। पिछले वर्षों के कड़वे अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए प्रदेशव्यापी टीकाकरण अभियान तेज़ कर दिया है। इस बार लक्ष्य 1.11 करोड़ गोवंश को वैक्सीन दी जाए, ताकि संक्रमण पर काबू पाया जा सके।
जोधपुर संभाग के बाड़मेर, जैसलमेर और सिरोही जालोर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं।
- मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स को तैनात किया गया है ताकि ढाणियों और दूरस्थ इलाकों तक दवा और वैक्सीन समय पर पहुंच सके।
- ग्रामीणों को बीमारी के लक्षण (गांठें, बुखार, दूध उत्पादन में कमी) पहचानने और तुरंत सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
2022 की तबाही का सबक
साल 2022 में लंपी वायरस ने राजस्थान को सबसे ज्यादा झकझोरा था।
- केवल राजस्थान में ही 50,000 से ज्यादा गायों की मौत हुई थी।
- दूध उत्पादन में प्रतिदिन 5 से 6 लाख लीटर तक की गिरावट आई थी।
- सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों—बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर—में देखा गया था।
इसी अनुभव से सीख लेते हुए सरकार ने इस बार स्वदेशी वैक्सीन “Lumpi-ProVacInd” का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है।

सरकार की रणनीति
- हर्ड इम्युनिटी बनाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण।
- सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी और जांच टीमें।
- ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन नंबर
क्या है लंपी वायरस?
लंपी स्किन डिज़ीज़ (Lumpy Skin Disease) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से गोवंश (गाय-बैल) को प्रभावित करती है। यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस (Capripoxvirus) से होती है और मच्छर, मक्खी, किलनी जैसे कीटों के जरिए तेजी से फैलती है। संक्रमित पशु में बुखार, त्वचा पर गांठें, दूध उत्पादन में कमी और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में पशु की मौत भी हो सकती है।
अतीत की घटनाएँ
- यह बीमारी सबसे पहले 1929 में ज़ाम्बिया (अफ्रीका) में पाई गई थी।
- 2019 में यह भारत के कई राज्यों में पहुँची और हजारों पशु प्रभावित हुए।
- 2022 में राजस्थान सहित पश्चिमी भारत में लंपी वायरस ने भीषण कहर ढाया, जिससे लाखों मवेशी बीमार हुए और हजारों की मौत हुई।
- तब से इस वायरस को रोकने के लिए सरकार ने वैक्सीनेशन अभियान और निगरानी व्यवस्था शुरू की है।
