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हिंदुत्व केवल पूजा पद्धति नहीं, पूर्ण जीवन जीने की पद्धति है – भय्या जी जोशी

हिंदुत्व केवल पूजा पद्धति नहीं, पूर्ण जीवन जीने की पद्धति है – भय्या जी जोशी

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इटानगर (विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के बिना भारत अधूरा है तथा भारत के बिना अरुणाचल प्रदेश का भी अस्तित्व नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत भूमि विविधताओं की धरा है, और यह हमारी संपन्नता का प्रतीक है. संपन्नता वह है जिनके पास कोई वस्तु बहुत अधिक होती है, विपन्नता वह है जिनके पास नहीं होती या कम होती है.

सरकार्यवाह अरुणाचल प्रदेश के प्रवास के दौरान नाहरलगून के आर्ट एंड कल्चर मैदान में गणमान्य जनों, महिलाओं, युवाओं के एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमें भारतीयों के रक्त में प्रवाहित एकत्व की भावना को पहचानकर मजबूत करना है और देश को आगे ले जाना है.

पड़ोसी देशों के साथ युद्धों का उदाहरण देते हुए भय्या जी जोशी ने कहा कि चीन के साथ हुये युद्ध को छोड़कर हमने अन्य सभी युद्धों में जीत हासिल की है. चीन के साथ युद्ध में हम कम शक्ति के कारण नहीं हारे, बल्कि हमारे नेताओं की कमजोर और पीछे हटने की मानसिकता के कारण हारे. अपने देश में धरती के बाहर व अंदर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने हमें अपार मात्रा में प्राकृतिक संसाधन दिये हैं, और इनका मानवता की भलाई के लिये आवश्यकता के अनुसार उपयोग की समझ भी हमें (भारतीय) दी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीयों को एकता की डोर में बांधने के प्रयास को आगे बढ़ा रहा है.

उन्होंने बल देकर कहा कि हमारा भारतीय समाज मूल हिंदुत्व से जुड़ी जड़ों के कारण उदार और मिलनसार है. यदि विश्व सभी धर्मों का समान रूप से आदर करने की हिंदुत्व की अवधारणा को ग्रहण करता है तो आतंकवाद, पर्यावरण असंतुलन, सहित आर्थिक समस्त समस्याएं पूरी तरह से जड़वत समाप्त हो जाएंगी. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल एक पूजा पद्धति नहीं है, अपितु एक पूर्ण जीवन जीने की पद्धति है, जो भारतीय समाज के साथ गहरे तक जुड़ी हुई है. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तथाकथित आलोचकों को चेतावनी देते कहा कि संगठन पर कोई टिप्पणी करने से पूर्व वास्तविक तथ्यों को जान लेना चाहिये.

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता प्रीतम ताफो ने कहा कि अरुणाचली समाज बहुत उदार है, और बिना किसी भेदभाव के सदभाव पूर्ण रूप से रहता है. उन्होंने कहा कि विभिन्न विचारों के प्रति मानसिक खुलापन, उसकी स्वीकार्यता, और सम्मिलन अरुणाचली समाज की ताकत है. पर, समय के साथ इसमें कुछ अंतर आ रहा है, जिस पर आत्म चितंन की जरूरत है. उन्होंने वरिष्ठ पीढ़ी से समाज नें सामाजिक सौहार्द की पुनः स्थापना के लिये जागरूक होने का आग्रह किया.

क्षेत्र के विभिन्न वर्गों से संबिंधत गणमान्यजनों ने कार्यक्रम में शिरकत की, उनमें नेता विपक्ष ताम्यो टागा, विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, सासंकृतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे. क्षेत्र की महिलाओं के समूह ने कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक प्रार्थना प्रस्तुत की

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