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धौंसपट्टी” पर अब चीन की शह

home0300509 मुनाबाव। पडोसी मुल्क पाकिस्तान अब देश की सुरक्षा को नए सिरे से चुनौती दे रहा है। फरवरी 2006 में मुनाबाव-खोखरापार के रास्ते दोस्ती का सफर शुरू करने की कीमत पर अन्तरराष्ट्रीय नियमों के विपरीत अस्थायी स्टेशन बनाने वाला पाकिस्तान अब पक्का व अन्तरराष्ट्रीय स्टेशन बनवाने की तैयारी में है और इसमें चीन उसकी मदद कर रहा है। स्टेशन निर्माण के लिए चीन की एक कंस्ट्रक्शन कम्पनी को ठेका दिए जाने की खबर है। करीब पन्द्रह दिन पहले चीन की कम्पनी के इंजीनियरों से सर्वे भी कराया गया है। तीन-चार महीने पहले स्टेशन के सामने तथा पीछे अर्थ वर्किग और जमीन के ऊपर कुछ निर्माण कर पाकिस्तान ने काम रोक दिया था। अब नए सर्वे के आधार पर खोखरापार स्टेशन से करीब दस किलोमीटर पहले पाक अन्तरराष्ट्रीय स्तर का आलीशान स्टेशन बनाने की फिराक में है। योजना के मुताबिक जीरो लाइन स्टेशन की रेल लाइन के निकट पक्की सडक भी बनाई जाएगी। भारी न पड जाए केन्द्र की चुप्पीथार एक्सप्रेस शुरू होने से पहले पाकिस्तान की जीरो लाइन पर स्टेशन निर्माण की कोशिशों पर बीएसएफ ने कडी आपत्ति दर्ज कराई थी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इसके लिए बीएसएफ ने केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप का अनुरोध भी किया, लेकिन बात दोस्ती के जुनून में दबी रह गई। बीएसएफ ने पाक रेंजर्स के साथ विभिन्न स्तरों की बैठकों में भी यह मुद्दा कई बार उठाया, लेकिन केन्द्र सरकार के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चुप्पी बरकरार है।अभी यह है स्थितिफिलहाल स्टेशन के नाम पर छाया के लिए लोहे के एंगल्स पर सीमेंट की चद्दरें लगी हैं। कहने को स्टेशन थार एक्सप्रेस के यात्रियों की जांच के काम आता है, लेकिन वहां कस्टम, इमीग्रेशन जांच केबिन तक नहीं हैं।सुरक्षा को खतरापाक रेलवे स्टेशन जीरो लाइन के निकट ऊंचे टीबे पर बना है। इसके सामने ही बीएसएफ का कॉन्फ्रेंस हॉल है। ऎसे में भारतीय क्षेत्र की हर गतिविधि पर पाक की सीधी नजर रहेगी। साथ ही सुरक्षा के लिए खतरा और बढ जाएगा। जीरो लाइन के निकट स्टेशन होने से पाक सेना के लिए सामरिक साजो-सामान रेल मार्ग से सरहद तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। हाल ही मुम्बई पर आतंकी हमले के बाद पाक से सटी सीमा पर उपजे तनाव के दौरान सीमा पर पाकिस्तानी फौज की तैनाती के दौरान अस्थायी स्टेशन तक पाक सैन्य साजो-सामान से लदी ट्रेनें आने की बात छिपी नहीं है।”नो मैन्स लैण्ड” का नियमअंतरराष्ट्रीय सीमा सम्बंधी नियमों के मुताबिक जीरो लाइन के दोनों तरफ 150-150 मीटर की दूरी तक का इलाका “नो मैन्स लैण्ड” होता है, जिसमें कोई भी देश किसी तरह का कच्चा या पक्का निर्माण कार्य नहीं करा सकता। भारत की ओर तारबंदी भी 150 मीटर की दूरी पर लगाई गई, लेकिन यह स्टेशन लगभग जीरो लाइन के ऊपर ही बना हुआ है। पडोसी देश की आपत्ति पर ध्यान न दिए जाने पर सम्बंधित देश को उसे ध्वस्त कर देने का अधिकार भी यह नियम देता है। लेकिन केंद्र सरकार अभी तक इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। खतरनाक पैंतराचीनी कम्पनी को जीरो लाइन पर आलीशान स्टेशन का ठेकाखोखरापार से 10 किमी पहले स्टेशन बनाने की फिराक में है पाकिस्तानजीरो लाइन स्टेशन की रेल लाइन के पास पक्की सडक बनाने की तैयारी15 दिन पहले चीन की कम्पनी के इंजीनियरों से करवाया सर्वे राजेन्द्र सिंह मान
राजस्थान पत्रिका
स्त्रोत : http://www.patrika.com/news.aspx?id=180782

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