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सीधी बात माननीय मोहन जी भागवत तथा प्रभु चावला के बीच

दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली के झंडेवालान स्थित आरआरएस मुख्यालय में इंडिया टुडे समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर प्रभु चावला से एक मुलाकात में वंदे मातरम् विवाद व भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन सहित विभिन्न विषयों पर बेबाक चर्चा की। इसी मुलाकात के विशेष अंश :
वंदे मातरम् पर देवबंद की प्रतिक्रिया के बारे में आप क्या सोचते हैं?

यह सारे भारतीयों के लिए है। वंदे मातरम् हमारे स्वतंत्रता आंदोलन व इतिहास का अंग है। एक समय था जब हिंदू व मुस्लिम दोनों इसे गाते थे।
मुस्लिम कहते हैं यह धर्म के खिलाफ है।

मुझे नहीं लगता कोई भी धर्म देशभक्ति के खिलाफ है। भारत माता की जय और वंदे मातरम् कहना धार्मिक पूजा अथवा मूर्ति पूजा जैसा नहीं है।
संघ का दृष्टिकोण क्या है? (टेबल ठोंककर) वंदे मातरम् कहना होगा।
क्या आपको लगता है कि (बाबरी) मस्जिद गिरने के बाद अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे?

मैं कहूंगा कि सरकार ने हिंदू समाज की इच्छाओं की उपेक्षा की। व्यवस्था के खिलाफ उठा गुस्सा ढांचे पर उतारा गया।
कांग्रेस ने सिख विरोधी दंगों के लिए माफी मांगी और आडवाणी ने कहा कि (बाबरी ढांचा) विध्वंस राष्ट्रीय शर्म का विषय है?

मैं आडवाणी से सहमत नहीं। इतने लोग इकट्ठा थे, तो कारसेवा की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
क्या नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए?

वे राज्य के प्रमुख हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि (गुजरात में हिंसा के दौरान) क्या हुआ था। यदि उन्हें लगता है कि ऐसा कुछ हुआ है, जिसके लिए माफी मांगने की जरूरत है तो वे माफी मांगेंगे। मुझे भरोसा है। मुझे बताया गया कि जिस गति से गुजरात में दंगों पर काबू पाया गया वह सराहनीय था। यदि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो उन्हें माफी क्यों मांगनी चाहिए।
सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह 1984 के दंगों के लिए जिम्मेदार नहीं थे, लेकिन उन्होंने माफी मांगी जिससे उनका कद ऊंचा हुआ है। यदि मोदी या आरएसएस ऐसा ही करें तो वे लाभ में ही रहेंगे?

उस समय टिप्पणी की गई थी, ‘जब एक बड़ा वृक्ष गिरता है तो कुछ चीजें होना अपरिहार्य है।’ ऐसा कोई बयान गुजरात में नहीं दिया गया था।
चार माह पहले आपने भाजपा नेतृत्व में परिवर्तन की बात कही थी। भाजपा तीन राज्यों में चुनाव हार चुकी है और कोई परिवर्तन होता नजर नहीं आ रहा है?

परिवर्तन तो होगा पर अपने समय पर। मैंने तो वही बताया था जो मुझे (भाजपा द्वारा) बताया गया था। उनके मन में योजना है, जो सामने आ रही है।
पर आपने कहा था कि नया नेता इन चार (सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू और अनंत कुमार) के अलावा कोई और होगा?

हां, नया नेता इन चारों के अलावा कोई और होगा। यही मुझे कहा गया है। इसी पर सहमति हुई थी और मुझे लगता है कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
आप दिल्ली के बाहर से किसी को लाएंगे जो 50 से 55 वर्ष की आयु के बीच का होगा?

वे दिल्ली से बाहर के किसी व्यक्ति को लाएंगे।
पिछले पांच-छह वर्षो में ऐसे कई लोगों को भाजपा में महत्व मिला है जो मीडिया द्वारा निर्मित हैं और संघ से उनका कोई ताल्लुक नहीं है। क्या इससे वैचारिक आधार कमजोर हुआ है?

संघ किसी के खिलाफ नहीं है। हम किसी को इस दृष्टि से नहीं देखते कि वह स्वयंसेवक है अथवा नहीं।
क्या आप भाजपा में आने वाले स्वयंसेवकों में भ्रष्टाचार की छवि देखकर चिंतित हैं?

राजनीति फिसलनभरा क्षेत्र है लेकिन हम अपने स्वयंसेवकों को फिसलते देखना नहीं चाहते। हम उनसे बात करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई करना भाजपा पर है।’
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