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न्यायिक फ़ैसले का पाकिस्तान में विरोध


हफ़ीज़ चाचड़

अयोध्या मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय की पाकिस्तान में कई राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने निंदा की है.

जहाँ भारत में फ़ैसले के बाद हिंदू और मुस्लिम संगठनों और नेताओं की ओर से काफ़ी सतर्कतापूर्ण बयान आए हैं वहीं पाकिस्तान के कुछ नेताओं और संगठनों ने तो इसे ‘मुसलमानों के ख़िलाफ साज़िश’ तक क़रार दिया है.

पाकिस्तान के कई संगठनों ने फ़ैसले का विरोध किया है और क्वेटा में कुछ धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा है कि इस्लामी दुनिया में इसके नकारात्मक प्रभाव होंगे.

सुन्नी इत्तेहाद काउँसिल

सुन्नी इत्तेहाद काउँसिल के प्रमुख फज़ल करीम ने कहा, “बाबरी मस्जिद पर भारतीय अदालत के फ़ैसले से दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं और भविष्य में इसके ख़तरनाक परिणाम निकल सकते हैं.”

बाबरी मस्जिद पर भारतीय अदालत के फ़ैसल से दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं और भविष्य में इसके ख़तरनाक परिणाम निकल सकते हैं

सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के अध्यक्ष

उन्होंने आगे कहा, “जहाँ तक बाबरी मस्जिद का प्रश्न है, तो वह करीब 400 सालों तक मुसलमानों की संपत्ति रही और हिंदुओं ने उसे शहीद कर दिया. अदालत को चाहिए था कि वह ज़मीन मुसलमानों को एक नई मस्जिद के निर्माण के लिए दे देती.”

फज़ल करीम के अनुसार पाकिस्तान के मुसलमान मुश्किल की हर घड़ी में भारत के मुसलमानों के साथ हैं.

धार्मिक मामलों के मंत्री हामिद सईद काज़मी

पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के केंद्रीय मंत्री हामिद सईद काज़मी ने इलहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले की निंदा की और कहा है कि ‘अदालत ने भारतीय मुसलमानों के साथ न्याय नहीं किया है और इस फ़ैसले से निराशा हुई है.’

उन्होंने कहा, “भारत अपने आप को एक लोकतांत्रिक देश कहता है लेकिन वह लोकतंत्र के सिद्धांतों पर अमल नहीं करता है.”

एक धार्मिक नेता मुफ़्ती नईम ने भी इस फ़ैसले को मुस्लिमानों के ख़िलाफ साज़िश क़रार दिया है.

1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया तो उस समय भारत की छवि पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा था और अब भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की छवि ख़राब हुई है

मुस्लिम लीग (नवाज़)

उन्होंने कहा, “बाबरी मुस्जिद का फ़ैसला मुसलमानों की भावनाओं को आहत करता है. हम इसका विरोध करते हैं और भारतीय मुसलमानों के साथ हैं.” उन्होंने कहा, “भारत सरकार से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है.”

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़)

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता सिद्दीक़ुल फारुक़ ने अयोध्या मामले में अदालत के फ़ैसले पर बात करते हुए कहा, “ये हिंदुओं को ख़ुश करने वाला फ़ैसला है.”

उन्होंने कहा, “1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया तो उस समय भारत की छवि पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा था और अब भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की छवि ख़राब हुई है.”

सिद्दीक़ुल फारुक़ के अनुसार मस्जिद और मंदिर अगर साथ बनेंगे तो इससे भी तनाव बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि अब भारतीय सुप्रीम कोर्ट न्याय के सिद्धांतों के सामने रखते हुए फैसला ले.

शिया नेता भी ख़िलाफ़

शिया नेता अल्लामा अब्बास कुमैली ने भी अदालती फ़ैसले की निंदा की है और कहा कि वे इसके ख़िलाफ़ शांतिपूर्वक ढंग से विरोध प्रदर्शन करेंगे.

उन्होंने मुस्लिम देशों के संगठन ओर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉन्फ़्रेंस (ओआईसी) से मांग की कि वह इस मामले पर भारत सरकार से बात करे.

ग़ौरतलब है कि जब 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था तो पाकिस्तान में उसका भारी विरोध हुआ था और कराची सहित देश के कई शहरों में मंदिरों को नुक़सान पहुँचाया गया था

पाकिस्तान हमेशा अपने नापाक कारनामो से कुछ न कुछ करने की कोशिश करता रहता है. अब उसके शैतानी दिमाग में अलग खुजली चल रही है ? भारत सरकार और भारत के मुसलमानों का यह दायित्व बनता है कि पाकिस्तान में अयोध्या को लेकर किसी प्रकार के बयानबाजी को पुरजोर शब्दों में ईमानदारी से विरोध करे.


source : http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/09/100930_pak_babri_verdict_as.shtml


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