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सुप्रीम कोर्ट न जाए मुसलिम समाज

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि बातचीत के जरिए अयोध्या विवाद का हल तभी संभव है जब मुसलिम समुदाय इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की भावना को स्वीकार करे और सुप्रीम कोर्ट में उसे चुनौती न दे। संघ का यह बयान मुसलिम और हिंदू समूहों से बातचीत के एक दिन बाद आया है। अयोध्या विवाद का बातचीत के जरिए हल तलाशने की कोशिश में बुधवार को हुई इस बातचीत में मुसलिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य भी शामिल थे। बातचीत के दूसरे दिन संघ के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कहा कि अयोध्या विवाद का वार्ता के द्वारा हल केवल तभी संभव होगा जब वे (मुसलिम) फैसले की इस भावना को स्वीकार करें कि हिंदुओं की आस्था है कि वह स्थल भगवान राम का जन्म स्थल है।

समाधान करने की कोशिश
इसके साथ ही वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को शीर्ष अदालत में चुनौती नहीं दें। यह पूछे जाने पर कि विभिन्न शहरों में अलग-अलग समूहों के बीच बातचीत को क्या समस्या का समाधान करने की कोशिश के रूप में अपनाया जा रहा है। माधव ने कहा कि संघ किसी वार्ता में संलग्न नहीं है लेकिन विभिन्न स्तरों पर लोग इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल संत उच्चाधिकार समिति को ही यह फैसला करने का अधिकार है कि कानूनी रास्ता अपनाया जाए या कोर्ट के बाहर समाधान तलाश जाए। हिंदू और मुसलिम समूहों और संघ के बीच बुधवार को जहां वार्ता चल रही थी और उसी दिन विश्व हिंदू परिषद और अयोध्या के धार्मिक नेताओं ने विवादास्पद स्थल को तीन हिस्सों में बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया।

मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी
माधव ने कहा संघ का रुख यह है कि अगर मुसलिम समूह इलाहाबाद हाईकोर्ट की भावना को स्वीकार करें और इस बात पर सहमत हो जाएं कि मसजिद किसी अन्य स्थल पर बनाई जा सकती है तभी हम इस मुद्दे पर उनसे बात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जलगांव में संघ की होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आगामी बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर को दो-एक के बहुमत फैसले में कहा है कि विवादास्पद स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के पक्षों में तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए।

अगर मुसलिम समुदाय इस बात पर सहमत हो जाए कि मसजिद किसी अन्य स्थल पर बनाई जा सकती है, तभी हम इस मुद्दे पर उनसे बात कर सकते हैं। – राम माधव, प्रवक्ता, आरएसएस

source: http://www.amarujala.com/National/The%20Supreme%20Court%20is%20not%20Muslim%20society-4945.html

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