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“युवा ही कर सकते हैं भ्रष्टाचार समाप्त”

खबरे समाचार पत्रों से

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अजमेर । आरएसएस के सरसंघ चालक मोहनराव भागवत ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी ही भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त कर सकती है। इसके लिए युवा वर्ग मन में इसे समाप्त करने का संकल्प लेना होगा।

गुरूवार को हरिभाऊ उपाध्याय नगर पार्क में बालाजी सायं शाखा में स्वयंसेवकों से बातचीत में भागवत ने युधिष्ठिर और दुर्योधन की कहानी सुनाते हुए कहा कि जो जैसा होता है उसे वैसा ही नजर आता है। प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई अच्छाई और बुराई होती है। अच्छाई को उजागर कर व्यक्ति को सही दिशा में चलने के लिए प्रेरित करेंगे तो बुराई स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए सदैव मन में सकारात्मक और सुविचार लेकर चलना चाहिए।
“राजा के दरबार के बाहर भगवान के नाम पर भ्रष्टाचार” की कहानी के माध्यम से उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का अंत कभी नहीं हो सकता। यह तब ही समाप्त होगा जब दूसरे लोग मन में इसे रोकने की ठान लेंगे। देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर युवाओं को चिंतन कर इससे दूर रहने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने “कल्पवृक्ष और गरीब आदमी” की कहानी सुनाते हुए कहा कि जैसा मन में सोचेंगे वैसा ही होता जाएगा। युवा यह ठान लें कि ना तो किसी से रिश्वत लेंगे ना ही देंगे तभी भ्रष्टाचार समाप्त होगा।

ऎसे बजाते हैं बांसुरी
बालाजी शाखा की शुरूआत में स्वयंसेवक ने प्रार्थना पर बंसी बजाई। प्रार्थना के बाद सरसंघ चालक ने स्वयं बंसी बजाकर स्वयंसेवक को सुर का ज्ञान दिया।

क्यों खुल गई ना पोल!
बालाजी शाखा में गुरूवार को 90 स्वयं सेवक उपस्थित हुए। भागवत ने स्वयं सेवकों से पूछा कि इतनी संख्या रोजाना रहती है, या आज ही है। मेरे आने की जानकारी आप लोगों को थी या नहीं। कुछ स्वयंसेवकों ने पहले इनकार किया। इसी बीच एक स्वयंसेवक ने बताया कि विद्यार्थी प्रमुख विश्वजीत ने बुधवार को आपके आने की सूचना दी थी। भागवत ने हंसते हुए कहा, “क्यों खुल गई ना पोल।”

पहले पढ़ाई पूरी करो…
सरसंघ चालक ने बालाजी शाखा के स्वयंसेवकों से परिचय लिया और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। नन्हे स्वयंसेवकों ने उन्हें एक बार और आने का निमंत्रण दिया। इस पर उन्होंने कहा, “एक बार मैं आया, अब आप आना।” नन्हे स्वयंसेवकों ने उनके साथ चलने का आग्रह किया। इसपर उन्होंने कहा कि पहले पढ़ाई पूरी करो, उसके बाद हमारे साथ चलना।

“समाज को संघ से अपेक्षा”


अजमेर । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहनराव भागवत ने कहा कि मौजूदा विश्व परिदृश्य में हिन्दुत्व और संघ दोनों महत्वपूर्ण हैं। देश की मौजूदा स्थिति में समाज को संघ से बहुत अपेक्षाएं हैं और संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक को इन पर खरा उतरना होगा।

गुरूवार को शहीद अविनाश माहेश्वरी विद्यालय में तीसरे दिन राजस्थान क्षेत्र के सभी 57 जिलों के जिला कार्यवाह, जिला प्रचारक और विभाग स्तर के पदाधिकारियों की बैठक में भागवत ने कहा कि हिन्दुत्व के दृष्टिकोण को समाज के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने शाखा की कार्य पद्धति को और ज्यादा बेहतर बनाने को लेकर भी विचार रखे। साथ ही 10 से 20 फरवरी तक चलने वाले जन जागरण अभियान में गांव-गांव और घर-घर जाकर केंद्र सरकार, कांग्रेस और राष्ट्रविरोधी संगठनों की नीतियां जन-जन तक पहुंचाने को कहा।

“दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं”
भागवत ने बैठक में कहा कि संत, मंदिर और आरएसएस राष्ट्र की सुरक्षा की गारंटी है। केंद्र सरकार झूठे आरोप लगाकर संघ, संत और श्रद्धा के प्रतीक मंदिरों को बदनाम कर रही है। हिन्दू समाज इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। हिन्दू समाज, भगवा रंग और आरएसएस आतंक के विरोधी हैं। कांग्रेस सरकार भगवा आतंक के नाम पर समस्त हिन्दू समाज को बदनाम कर रही है, जबकि यही भगवा रंग राष्ट्र ध्वज का सिरमौर है।

सरकार विफल
उन्होंने कहा कि हिन्दू संतों और मंदिरों की रक्षा करने में केंद्र सरकार विफल रही है। केंद्र ने हिन्दू संतों को अपमानित करने का भी भरपूर प्रयास किया। कांची पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य को दीपावली के दिन गिरफ्तार किया गया। ओड़ीसा में वनवासियों के बीच रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सुधार के काम करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कारण वहां हिन्दुओं का मतान्तरण रूक गया था। देश विरोधी लोगों ने उनकी हत्या के नौ बार प्रयास किए। इसके बावजूद देश विरोधी ताकतों के दबाव में उनकी सुरक्षा वापस ली गई और उनकी हत्या हो गई। उनकी हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया।

अधिकांश पदाधिकारी लौटे
संघ के 1 से 3 फरवरी तक चले संठनात्मक बैठकों के दौर में उपस्थित होने के बाद अधिकांश जिला और विभाग स्तर के पदाधिकारी गुरूवार को लौट गए। क्षेत्रीय और प्रांत स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की बैठक शुक्रवार को भी होगी।

पृथ्वीराज चौहान को किया नमन
संघ के प्रचारक और पदाधिकारियों ने पृथ्वीराज चौहान स्मारक पहुंचकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। पूर्व राज्यसभा सदस्य ओंकारसिंह लखावत ने स्मारक बनाने में आई बाधाओं की जानकारी दी।

संघ प्रमुख का बाल स्वंयसेवकों को जोड़ने पर जोर

अजमेर। अजमेर प्रवास पर आए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नन्हें स्वयंसेवकों से मेल बढ़ाना शुरू कर दिया है। शाखाओं में नन्हें स्वयंसेवकों के साथ बतियाते हुए वे स्वयं को बहुत सहज महसूस कर रहे हैं। उनसे मुलाकात करने वाले स्वयंसेवक इस नजदीकी से खासे उत्साहित हैं।

शाखाओं में नित मोहन भागवत का पहुंचना और नन्हें स्वयं सेवकों से मिल, उन्हें कहानियों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास और भ्रष्टाचार के खात्में के बारे में समझाना काफी प्रेरक बना हुआ है, इससे साफ होता है कि संघ से नए स्वयंसेवकों को जोड़ने के प्रति वे कितने गंभीर हैं।

गुरुवार को अजमेर प्रवास के तीसरे दिन उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ खोले मोर्चे को अमली जामा पहनाया। प्रचार सामग्री को अंतिम रूप दिया। दोपहर तीन बजे तक बैठक ली और टीम को रवाना किया। बाद में वे शाखा पहुंचे। नन्हें स्वयं सेवक उनसे किसी सेलिब्रिटी की तरह मिले। उन्होंने ध्वजवंदन के लिए बांसुरीवादन भी किया तो व्यायाम भी। बाद में उन्होंने किस्से कहानियों के जरिए बौद्धिक भी दिया।

source: http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-union-are-the-major-target-for-child-volunteers-1817855.html

संस्कार युक्त हो

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत का मानना है कि जैसा मन में होता है वैसा ही व्यक्तित्व भी हो जाता है। लोग भी उसी तरह के मिलते हैं। उन्होंने कहानी सुनाई-दुर्योधन को भीष्म पितामह से शिकायत थी कि वे युधिष्ठिर को ही ज्यादा चाहते हैं, उसे नहीं। पितामह ने युधिष्ठिर को बुलवाया। उन्होंने युधिष्ठिर को कहा कि वह एक बुरे आदमी को ढूंढकर लाए, दुर्योधन को कहा कि वह एक अच्छे व्यक्ति को ढूंढकर लाएं। दोनों चले गए। दुर्योधन को एक भी अच्छा आदमी नहीं मिला और युधिष्ठिर को एक भी बुरा नहीं मिला। दोनों लौट आए। पितामह ने समझाया कि जो आपके मन में है वैसे ही लोग मिलते हैं। संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को समझाया कि वे अच्छे बनें

खतम करे भ्रस्टाचार

एक था गांव। उसमें एक युवक भी रहता था। उसके पास कोई काम धंधा नहीं था। उसने पैसा कमाने के लिए एक काम किया। भगवान गणेश की एक मूर्ति और थोड़ी रोली लेकर वह गांव के बाहर के रास्ते पर बैठ गया। गांव वालों और हर आने जाने वालों को वह रोकता। उनसे कहता कि गणेशजी की मुहर लगे बिना आप लोगों के काम सफल नहीं होंगे। लोगों ने उसकी बात मान ली। वह रोली से गणेशजी की प्रतिमा की मुहर लगाता। लोगों के काम होने लगे। उन्हें भरोसा हो गया कि गणेशजी की मुहर से काम बनता है। युवक ने मुहर लगाने के बदले एक आना, दो आना, चर आना और फिर रूपया लेना शुरू कर दिया। एक बार राजा ने राज्य में एक बड़े काम की शुरुआत की। काम सफल नहीं हुआ तो सलाहकारों ने सलाह दी कि गणेशजी की मुहर लगाने से काम हो जाएगा। राजा ने कहा यह तो भ्रष्टाचार है। भला ऐसा भी कहीं होता है। सलाहकारों ने कहा कि भ्रष्टाचार तो सदियों से चला आ रहा है और चलता रहेगा। यह कभी खत्म नहीं हो सकता। राजा यह मानने को तैयार नहीं था। उसने एक सलाहकार को कहा कि तुम जंगल में एक कोठरी में रहना। सुबह शाम तुम्हें खाना मिलता रहेगा। तुम्हारी जरूरतें पूरी होती रहेंगी तो भ्रष्टाचार होगा ही नहीं। सलाहकार कोठरी में रहने चला गया। पास ही नदी थी। जिसमें आने जाने के लिए लोग नावों का इस्तेमाल करते थे। सलाहकार ने नाव चलाने पर पाबंदी लगा दी। उसका कहना था कि राजा ने नदी की लहरें गिनने का काम दिया है। नावें आएंगी जाएंगी तो गिनती नहीं हो पाएंगी। नाव चलाने के लिए लाइसेंस लेना होगा। हर माह उसे रिन्यू भी कराना होगा। बदले में उसने पैसा लेना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद राजा वहां पहुंचा तो सलाहकार ने रुपयों से भरा बोरा थमाते हुए कहा कि मैने पहले ही कहा था कि भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता। राजा ने जवाब दिया कि भ्रष्टाचार मन में होता है। आप तय कर लें कि काम कराने के बदले रिश्वत देंगे न लेंगे तो भ्रष्टाचार अपने आप खत्म हो जाएगा.


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साभार : दैनिक भास्कर
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