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अवैध पाकिस्‍तानी-बांग्‍लादेशी जनसंख्‍या विस्‍फोट से भारत तबाह

नई दिल्‍ली. अमेरिका में 9/11 को 10 साल हो गए हैं। इसके बाद वहां आतंकी चाह कर भी दोबारा कोई वारदात नहीं कर सके हैं। भारत (मुंबई) में 26/11 को 3 साल भी नहीं बीते हैं। यहां उसके बाद से कम से कम 5 बड़ी आतंकी वारदात हो गई हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि हर आतंकी हमला रोकना संभव नहीं है और पी. चिदंबरम बोले कि देश के हर शहर में ऐसा खतरा मौजूद है। इन बयानों की आलोचना हुई, लेकिन वास्‍तव में ये दोनों बयान सच हैं।

भारत में आतंकी हमले की तमाम वजह मौजूद हैं। सबसे बड़ी वजह यहां के कई शहरों में घुसपैठ कर भारत को घर बना चुके करोड़ों बांग्‍लादेशी और पाकिस्‍तानी हैं। 2001 की जनगणना के मुताबिक भारत में करीब 4 करोड़ बांग्‍लादेशी थे।
बांग्‍लादेशियों की बाढ़
आईबी के मुताबिक भारत में लगभग डेढ़ करोड़ बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें से 80 लाख पश्चिम बंगाल और 50 लाख असम में हैं। 4.75 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए बिहार के कटिहार, साहेबगंज, किशनगंज और पूर्णिया जिलों में मौजूद है। लगभग 3.75 लाख त्रिपुरा और 4 से 5 लाख दिल्ली में मौजूद है। नगालैंड और मिजोरम में भी बांग्लादेशी घुसपैठिए शरण लिए हुए हैं। 1991 में नगालैंड में अवैध घुसपैठियों की संख्या जहां 20 हजार थी वहीं अब यह 80 हजार हो गई है।
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में दिए गए एक शपथपत्र में स्वीकार किया है कि दिल्ली में लगभग 13 लाख अवैध बांग्लादेशी मौजूद हैं। इन्‍होंने तो राशन कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आई कार्ड भी जुटा लिए है।

असम के 27 जिलों में से आठ में बांग्लाभाषी मुसलमान बहुसंख्यक बन चुके है। 1901 से 2001 के बीच असम में मुसलमानों का अनुपात 15.03 प्रतिशत से बढ़कर 30.92 प्रतिशत हुआ है।
असम के पूर्व राज्यपाल ले. जनरल अजय सिंह ने कहा था कि 6000 बांग्लादेशी अवैध रूप से प्रतिदिन सीमा पार कर भारत में प्रवेश करते हैं। यह अवैध घुसपैठ प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख होती है। बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं बिहार की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। 2001 की जनगणना के अनुसार, असम में हिन्दू वोटरों में प्रतिवर्ष 19 प्रतिशत और मुस्लिम वोटरों में 35 प्रतिशत वृध्दि दर्ज की गई। देश भर में 195 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां बांग्लादेशी नागरिक मतदाता बनकर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
14 जुलाई, 2002 को संसद में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत में 10 करोड़ 20 लाख 53 हज़ार 950 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। इनमें से केवल बंगाल में ही 57 लाख हैं।
पाकिस्‍तानी भी कम नहीं
मुंबई महानगर पालिका द्वारा वर्ष 2009 के अंतिम महीनों में प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी स्थिति में 90 हजार पाकिस्तानी बेखटके रह रहे हैं। मुम्बई की एक करोड़ 19 लाख 78 हजार 450 की आबादी में पाकिस्तानियों की संख्या 89 हजार 838 है। हालांकि पिछले साल मार्च में सरकार ने संसद में बताया था कि देश में कुल 677 पाकिस्‍तानी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।गृह राज्यमंत्री ने राज्यसभा को बताया था कि भारत में नियम अवधि से अधिक समय तक रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या वर्ष 2006 में 5,392, वर्ष 2007 में 6,038 और वर्ष 2008 में 7,547 थी।रामचंद्रन ने बताया कि वर्ष 2006 में 83,426 पाक नागरिक भारत आए थे। वर्ष 2007 में 1,07,906 पाक नागरिक और 2008 में 85,529 पाक नागरिक भारत आए थे। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से रहने वाले पाक नागरिकों को गिरफ्तार करना और उनके विरूद्ध मामले दर्ज करना संबंधित पुलिस स्टेशनों, राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासनों के क्षेत्राधिकार में है। लेकिन हकीकत यह है कि स्‍थानीय प्रशासन को जानकारी या चिंता ही नहीं होती कि जो पाकिस्‍तानी आए, वे अपने देश गए भी या नहीं।

लापरवाही और राजनीति
भारत में आए अवैध बांग्‍लादेशी और पाकिस्‍तानी लोगों के लिए यहां बस जाना एकदम आसान है। एक तो पुलिस-प्रशासन के पास इन पर नजर रखने की कोई ठोस व्‍यवस्‍था नहीं है। दूसरे, वोट बैंक के चलते नेता इन्‍हें पूरा भाव देते हैं।

इसके उलट, अमेरिका में किसी भी देश से आने-जाने वाले लोगों पर सरकार की कड़ी नजर रहती है। उसने सख्‍त कानून के जरिए भी विदेशी, खास कर एशियाई नागरिकों का अवैध रूप से रहना काफी मुश्किल बना रखा है

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