उन्होंने राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ को अनुशासन का दूसरा नाम बताया।
कार्यकर्ताओ के कई प्रकार का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा की गुरु से ज्ञान लेना चाहिए ज्ञानवान से ज्ञान लेना ही चाहिए. दाता कौन होता है ? अर्थ व् दान देने वाले दाता नहीं होता।दुसरो को सम्मान देने वाला दाता होता है। भाषा एवं व्यवहार में विनम्रता होनी कहिये। विद्या के साथ विनय होना चाहिए. विद्या के विकास के लिए ज्ञानियों से ज्ञान लेना चाहिए। गीता का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की ज्ञान के लिए गुरु के सामने झुको , जिज्ञाशु तथा परिश्रमी बनो और गुरु की सेवा करो।
आचार्यश्री महाश्रमण जी ने कहा की विद्या बल, यश, बलम, दक्षता, कार्य को सुन्दर व्यवस्थित और दक्षता से कार्य करे वही कार्यकर्त्ता जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त कर सकता है।
कार्यकर्त्ता नशामुक्त, राष्ट्र धर्म में ईमानदारी और नैतिकता , समर्पण का भाव, संस्कार दिलो में बने होते है और यही कार्यकर्त्ता सामान्य आदमी से बड़ा होता है, सेवाभाव उसमे होता है।
आचार्यश्री ने आव्हान किया की अपने जीवन में विशेष करो लक्ष्य राष्ट्र सेवा का बन जायेगा। बूंद बूंद विशेष से विशेषताओ का घड़ा भरना चाहिए।
क्षेत्रीय प्रचारक माननीय दुर्गादास जी , माननीय मूलचंद जी, माननीय प्रकाश जी,क्षेत्रीय
संपर्क प्रमुख राजेंद्र जी, माननीय नन्दलाल जी जोशी
परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने स्वयंसेवको तथा उपस्थित तेरापंथ समाज के धर्मप्रेमियों को उधबोधन देते हुए कहा कि हम सब लोगो को महाश्रमण जी ने सटीक शब्दों में कार्यकर्त्ता का स्मरण कराया है. हमारा कार्य हिन्दू समाज को संगठित करते हुए अपने राष्ट्र को परम वैभव पर पहुचाना है. देश के स्वतंत्र होने के ६५ वर्ष बाद भी कुछ बातें ठीक हें और कुछ नहीं है. राष्ट्र कि सब बातों को ठीक करते हुए राष्ट्र कि सर्वांगीन उन्नति होनी चाहिए . राष्ट्र यानि सबका विकास है. आज से २००-२५० वर्ष पहले भारतीय को विदेशो में मजदूर बना कर भेजा और उन्होंने विदेशो में नया भारत बसा लिया और उन्होंने भारत की जीवन पद्धति को सबको बतलाया.
आचार्य ने जो कार्यकर्ता के ये सात गुण बताए
है। हम उन्हें जीवन में भी समाहित करें और भारतीय संस्कृति के निर्माण व उत्थान में आगे बढ़ते रहें।
क्योंकि हम बदलेंगे तो पूरी दुनिया बदलेगी। डॉ.
भागवत ने कहा कि राष्ट्र का सर्वांगीण विकास ही हमारा लक्ष्य है। सर्वांगीण विकास का अर्थ है, जमीन, जल, जन, जंगल, जानवर सभी का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे मूल पूर्वज
एक है, हमारी संस्कृति एक
है और हमारे लिए
भारतीयता ही हमारी पहचान है।
बैर भाव नहीं रखने वाला एकमात्र देश है। मुसलमानों के हितों से कोई विरोध
नहीं है. उन्होने कहा कि संघ व तेरापंथ का कार्य एक जैसा ही है। युवा स्वभाव,
उत्साह, साहस व निर्भिकता का नाम है। राष्ट्र के निर्माण में युवाओं का ही
योगदान है।
युवाओं से अपेक्षा है कि वे अपनी प्रतिभा को संभाल कर उसे राष्ट्रीय निर्माण में लगाएं।
कार्यक्रम के दौरान गायक कलाकार प्रकाश माली द्वारा राष्ट्र जागरण भावना को लेकर रचित सी.डी. का विमोचन मोहन जी भागवत द्वारा किया गया।
कार्यक्रम
में जसोल, बालोतरा, समदड़ी, पचपदरा, सिवाना, सिणधरी, गुड़ा, चौहटन, बाड़मेर, शिव, बायतु, जालोर, भीनमाल आदि स्थानों से स्वयंसेवक
पहुंचे। कार्यक्रम में 45सौ स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित थे.
क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख नंदलाल जी जोशी, क्षेत्रीय
संपर्क प्रमुख राजेंद्र जी, क्षेत्रीय सह संपर्क प्रमुख प्रकाशचंद्र जी , प्रांत प्रचारक मुरलीधर जी , विभाग प्रचारक राजाराम जी भी उपस्थित थे। जिला संघ चालक सुरंगी
लाल ने अतिथियों को परिचय व आभार
व्यक्त किया।











