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सत्य, शिव, सुन्दरता यही कला के मूल आधार : डॉ मोहनराव भागवत

सत्य, शिव, सुन्दरता यही कला के मूल आधार : डॉ मोहनराव भागवत

Source: newsbharati      Date: 8/24/2012 6:55:15 PM
(संस्कार भारती, नागपुर स्थापना के २५ वर्ष निमित्त समारोह)undefinedन्यूजभारती : नागपुर : २३ अगस्त २०१२ :
कला का सीधा संबंध मानव के हृदय से होता है. उसी प्रकार संस्कार भी सीधे
ह्रदय से संबंधित होते है. सुप्रसिद्ध असमिया गायक भूपेन हजारिका जब बहुत
बीमार थे तब सुश्री लता मंगेशकर जी के फोन पर स्वर सुनते ही उन्होंने
प्रतिसाद दिया था, इस की याद दिलाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
सरसंघचालक डॉ मोहनराव भागवत ने कहा कि, कला मनुष्य के ह्रदय को छूती है और
प्रभावित करती है. तर्क से तो केवल बुद्धि से संवाद स्थापित किया जा सकता
है; पर कला मानव के जीवन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए यह आवश्यक है की
कला बहुजन हिताय हो.
डॉ भागवत नागपुर में संस्कार भारती के नागपुर शाखा
के २५ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक शानदार समारोह में
उपस्थित समुदाय को संबोधित कर रहे थे. मंच पर संस्कार भारती के संरक्षक
योगेन्द्र जी, संस्कार भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष सुप्रसिद्ध मराठी सिने
दिग्दर्शक राज दत्त, मंत्री कामतानाथ वैशम्पायन, विदर्भ प्रान्त अध्यक्ष
राजेंद्र जैसवाल, नागपुर महानगर अध्यक्षा कांचन गडकरी तथा कार्याध्यक्ष
वीरेंदर चांडक उपस्थित थे.
संस्कार भारती गीत और गणेश वंदना के पश्चात
राज दत्त जी ने सरसंघचालक डॉ भागवत का शाल, श्रीफल और तुलसी का पौधा देकर
सम्मान किया. डॉ भागवत जी के हाथो योगेन्द्र जी को शाल श्रीफल तथा मानपत्र
देकर सम्मानित किया गया. उसी प्रकार राज दत्त जी, राजेंद्र जैसवाल, कामता
नाथ जी का भी सम्मान किया गया.
अपने उद्बोधन में सरसंघचालक डॉ भागवत ने
कहा कि, कला के बारे में अपनी दृष्टि सत्यम, शिवम्, सुन्दरम् ऐसी है. कला
सत्य को प्रकट करती है और कला के शिवत्व तक इसी सत्य के आधार पर पहुँच पाना
संभव होता है. इसी प्रवास में सुन्दरता की सृष्टि होती है. सुन्दरता के
बिना आनंद नहीं मिलता, इसलिए कला सुन्दर होनी चाहिए. सुन्दरतापूर्वक शिवत्व
की अनुभूति सत्य के प्रतिपादन से करना यह कला का उद्देश्य है. कला की यही
भारतीय जीवन दृष्टी है. जीवन में जितनी सत्य, शिव और सुन्दरता की मात्रा
होगी जीवन उतना ही सुखकर और सुन्दर होगा. असत्य, अशिव और असुन्दरता को जीवन
से हटाना और सत्य, शिव और सुन्दरता के भाव को जगाना यही कला का प्रधान
कार्य है.
संस्कार भारती के माध्यम से कलाकारों के कला गुणों को सदा
प्रज्वलित रखना और भारतीय दृष्टि को विश्व के कला जगत में प्रस्थापित करना
यह संस्कार भारती का कार्य है, डॉ भागवत ने कहा.
आज संस्कार भारती
नागपुर ने २५ वर्ष पूर्ण किये है. किसी भी कार्य के सिंहावलोकन के
कार्यक्रम, उपक्रम, प्रभाव और परिणाम यह चार लक्षण होते है. परन्तु कार्य
तो इनके परे होता है. वह दिखाई नहीं देता; वह अनुभवगम्य है. इसलिए आज का
प्रसंग हमारे लिए अंतर्मुख हो कर कार्य के बारे में विचार करने का है.
आज
देश के बहुत से क्षेत्रो में परिस्थिति चिंताजनक है. उसके जंजाल से सुखरूप
निकल कर अपने गंतव्य की ओर बढ़ना यह संस्कार से ही संभव है. हमारे संस्कारो
का अनुभव हमारे आचरण में दिखना चाहिए. संस्कारों का सम्बन्ध सीधा ह्रदय से
होता है. पशुओ में यह विचार नहीं होता पर मनुष्यों में होता है. वह
विचारों से नारायण या राक्षस बन सकता है. हमारे अन्दर एकत्व की भावना जागृत
हुई तो हमारा आचरण भी संस्कारयुक्त हो सकता है.
संघ के प्रमुख ने कहा
की कला सत्य को प्रकट करती है परन्तु वह सत्य हर बार आनंद देने वाला होगा
यह हमेशा संभव नहीं होता इसलिए उस को शिवत्व का आधार चाहिए. उस के कारण कला
में पावित्र्य निर्माण होता है और सुन्दरता की अनुभूति होती है. सुन्दरता
पूर्वक शिवत्व की अनुभूति सत्य के प्रतिपादन से करना यह कलाकार का काम है.
कला की यही जीवनदृष्टि है.
संस्कार भारती के कार्यकर्ताओं को आवाहन करते
हुए डॉ भागवत ने कहा कि, कला के क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने इन विचारों को
कला जगत में प्रस्थापित और प्रतिष्ठित करना आज की परिस्थिति में अतीव
आवश्यक है. परिश्रम से जन शक्ति का निर्माण हो सकता है और उसी जन शक्ति से
प्रभावी कार्यकर्ता मिलते है; जिन के आधार पर हम समाज में संस्कार युक्त
वातावरण निर्माण कर अपेक्षित परिवर्तन ला सकेंगे. इस हेतु हमें आत्मचिंतन
करना चाहिए.
अपने सम्मान के उत्तर में योगेन्द्र जी ने कहा कि, आज
उन्हें विशेष आनंद की अनुभूति हो रही है. हिन्दू राष्ट्र के संगठन का मंत्र
जिस महापुरुष ने दिया उस डॉ हेडगेवार की भूमि में हम है. आज डॉ हेडगेवार
की विशेष रूप से याद आ रही है. हमारी शक्ति कार्यकर्ताओं की शक्ति है.
इस
कार्यक्रम के लिए ईटानगर से नागपुर आये ९० वर्ष के ‘युवा’ योगेंद्रजी, जिन
को सब ‘बाबाजी’ नाम से आदर से पुकारते है, ने कहा कि, असम में कोकराझार की
स्थिति गंभीर है. लोग वहां अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ रहे है.
उनके विधायक को ही सरकार ने हिंसा फ़ैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है.
वहां के लोग उस का विरोध कर रहे है. आज बंगलादेशी मुसलमानों के घुसपैठ के
कारण असम तथा पूर्वांचल की स्थिति गंभीर बनी है. ऐसी पारिस्थिति में भी
संस्कार भारती के कार्यकर्ता वहां के २७ जिलो में काम कर रहे है.
योगेन्द्र
जी ने आगे कहा कि, उधर अरुणाचल प्रदेश में ईसाइयत के आक्रमण से बचने के
लिए वहां के युवा आगे आ रहे है. चार पत्रकारों ने गाँव-गाँव जा कर संस्कार
भारती के लिए कार्यकर्ता जोड़े है. आगामी २५-२६-२७ अक्तूबर को सुबनसिरी जिले
के एक गाँव में ५००० युवकों का एक संमेलन होने जा रहा है. विदर्भ ने
अरुणाचल प्रदेश को ‘गोद’ लिया है; अतः यहाँ से कुछ लोगो ने वहां जा कर उन
युवको का अभिनन्दन करना चाहिए और उन का हौसला बढ़ाना चाहिए.
ईशान्य भारत
के ८ राज्यों में संस्कार भारती का काम अच्छा बढा है और कलाकारों के माध्यम
से समाज में देशप्रेम के संस्कार एवं राष्ट्रभक्ती का संचार करने में
संस्कार भारती को यश मिल रहा है, योगेन्द्र जी ने कहा.
कार्यक्रम के
दुसरे अंतराल में संस्कार भारती के कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत
किये. ‘संस्कृति उत्सव’ इस नाम से सादर इस कार्यक्रम के अंतर्गत ‘संगीत
सौभद्र’ नाटक से नांदी गायन, सुबोध सुर्जिकर द्वारा सादर ‘कलौत्पत्ति का
मूक नाट्य’, स्वाति भालेराव की टीम ने ‘गोंधळ’, ‘श्रीमंत योगी’ नाटक का एक
प्रवेश, सिक्किम का लोक नृत्य, मंगलागौरी गीत, कोली नृत्य और अरुंधती
देशमुख का रबिन्द्र संगीत तथा डॉ संगीता नायक ने सादर किया ‘राग वृन्द’
कार्यक्रम ने सब रसिक जनों का मन मोह लिया. सरसंघचालक डॉ भागवत पूर्ण समय
इस कार्यक्रम में उपस्थित थे.
ज्येष्ठ विचारक मा गो वैद्य, प्राचार्य
अरविन्द खांडेकर, डॉ श्रीरामजी जोशी, संस्कार भारती के गणेश रोड़े, नागपुर
महानगर संघचालक डॉ दिलीप गुप्ता, डॉ मन्दाकिनी गुप्ता, विश्राम जामदार,
पंडित प्रभाकर देशकर आदि उपस्थित थे.
कार्यक्रम का सफल सञ्चालन दीप्ती कुशवाह ने किया और धन्यवाद् ज्ञापन संस्कार भारती नागपुर के कार्याध्यक्ष वीरेंदर चांडक ने किया.
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