Vsk Jodhpur

आरएसएस न भेदभाव करता है, न ही पक्षपात

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने वृहस्पतिवार को यह कह कर सभी को हैरत में डाल दिया कि भाजपा संघ के लिए खास नहीं है क्योंकि सभी राजनीतिक दल संघ के अपने हैं.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने आम लोगों से संवाद के एक कार्यक्रम में दो टूक कहा , यह एक आम धारणा है कि भाजपा संघ का अपना राजनीतिक दल है लेकिन यह सच नहीं है. मैं आपको बता दूं कि संघ का राजनीति से कोई वास्ता नहीं है. भागवत ने यहां तक कहा कि कांग्रेस और साम्यवादी दलों में भी संघ के स्वयं सेवक काम कर रहे हैं. इसका यह अर्थ तो नहीं है कि वह दल संघ के हैं अथवा संघ उनसे संबद्ध है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा में संघ के सर्वाधिक स्वयं सेवक शामिल है. लेकिन इसका यह अर्थ नहीं लाया जाना चाहिए कि भाजपा संघ की राजनीतिक पार्टी है क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल संघ का नहीं है. भागवत ने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाले संघ के स्वयं सेवक इसी शर्त पर वहां जाते हैं कि वह बेशक भाजपा छोड़ दें लेकिन संघ नहीं छोड़ेंगे.
भागवत ने कहा कि संघ देश हित को सर्वोपरि मानता है और देश की उन्नति के लिए वह पूरी तरह समर्पित है. उन्होंने कहा कि जो लोग इस उद्देश्य से देश में काम कर रहे हैं , संघ उनके साथ खड़ा है और उनकी हरसंभव मदद करेगा. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का स्वाभाविक काम ही समाज को तोड़ना है क्योंकि राजनीति समाज को तोड़कर ही की जाती है. इसीलिए संघ किसी भी पार्टी या राजनीति से अपने को दूर रखता है.
‘मंदिर निर्माण में सहयोग के लिये तैयार रहे मुस्लिम नेता’
मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद संघ ने मुस्लिम नेताओं से कहा था कि यह उचित समय है जब वह आगे बढ़कर रामजन्म स्थान पर राम मंदिर के निर्माण में सहयोग के लिये तैयार हो जायें. उन्होंने कहा ‘इससे सबसे बड़ा लाभ यह होता कि देश के मुसलमानों को यश मिलता और उनका उदारवाद पूरी दुनिया के सामने एक नजीर बन जाता. दूसरे अंग्रेजों द्वारा हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिये खड़ी की गयीं तमाम विवाद की बातें हमेशा हमेशा के लिये समाप्त हो जातीं.’
उन्होंने दावा किया कि 1857 से पहले भी रामजन्म भूमि हिंदुओं को दे दी गयी थी लेकिन वहां अंग्रेजों ने ही जानबूझकर फिर से विवाद खड़ा किया और मुसलमानों और हिंदुओं में हुये इस करार के दोनों पक्षों के कर्ता धर्ताओं को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद फांसी पर चढ़ा दिया.
‘मंदिर के निर्माण से राष्ट्रीय सम्मान स्थापित’ 
यह पूछे जाने पर कि राम मंदिर के निर्माण से क्या लाभ होगा, भागवत ने कहा, ‘राम मंदिर के निर्माण से राष्ट्रीय सम्मान स्थापित होगा और देश में राष्ट्रवाद प्रखर होगा.’ यह पूछे जाने पर कि राम मंदिर जैसे मुद्दे के हाथ से जाने के बाद क्या संघ कमजोर हुआ है, भागवत ने कहा, ‘संघ कमजोर नहीं हुआ है क्योंकि राजनीतिक दलों की तरह संघ मुद्दों के आधार पर संगठन का कार्य नहीं करता है बल्कि वह प्रेम, मित्रता, आत्मीयता और देशभक्ति के आधार पर संगठन का कार्य करता है.’
‘पाक पीड़ित हिंदुओं को मेहमान की तरह रखें’
पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ र्दुव्‍यवहार के संबंध में पूछे गये सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि संघ ने वहां से पलायन कर भारत आ रहे हिंदुओं के हितों की रक्षा का आग्रह सरकार और देश के लोगों से किया है. उन्होंने कहा कि संघ ने देश के लोगों का आह्वान किया है कि वह पाकिस्तान से आने वाले पीड़ित हिंदुओं को अपने मेहमान की तरह रखें और वहां सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ही उन्हें ससम्मान वहां वापस भेजें.
‘संघ को मुसलमानों से कोई परहेज नहीं
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संघ को मुसलमानों को अपने संगठन में शामिल करने से कोई परहेज नहीं है और संघ में अनेक मुस्लिम प्रचारक भी हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि संघ राजनीतिक दलों की तरह उनके नाम का प्रचार कर अल्पसंख्यक समुदाय में लोकप्रियता नहीं पाना चाहता.
Bhaskar+Ranchi+05102012
साभार: दैनिक भास्कर, रांची 

रांची : संघ का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। हमारे लिए सभी दल बराबर हैं। जो भी संघ के आदर्श को मानेगा, उनके लिए हमारे दरवाजे खुले हैं। संघ का काम व्यक्ति व समाज का निर्माण है राजनीति करना नहीं। सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने राम मंदिर निर्माण के प्रति कटिबद्धता दर्शाते हुए कहा कि यह हो कर रहेगा। इसके लिए जनआंदोलन के माध्यम से संसद पर कानून बनाने के लिए दबाव बनाया जाएगा। इस आंदोलन में मुस्लिमों से भी शामिल होने की बात कही। भागवत ने मुस्लिमों से संघ की शाखाओं पर भी आने की बात कही।
गुरुवार को रांची में संघ के कार्यक्रम में मोहन भागवत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का राजनीति से संबंध नहीं है। राजनीति समाज को तोड़ने का काम करती है, जोड़ने का नहीं और संघ का काम समाज को संगठित करने के साथ-साथ व्यक्ति का निर्माण करना है। संघ के लिए कोई पार्टी अछूत नहीं। हमारी विचारधारा को मानते हुए जो भी मदद मांगेगा, करेंगे। सभी पार्टियों में स्वयंसेवक हैं, भाजपा में ज्यादा हैं। इसलिए उनकी संघ से ज्यादा निकटता है। वे किसी मुद्दे पर मदद मांगते हैं वहीं दूसरे दल वाले इसके लिए हिम्मत नहीं जुटा पाते। उन्हें लाज आती है।
राम मंदिर का निर्माण हो कर रहेगा :
राम मंदिर निर्माण के संबंध में कहा कि यह पूरा आंदोलन हिंदू समाज का है, जिसे संत समाज आंदोलित कर रहा है। संघ का इसे प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। यह झगड़ा सिर्फ राजनीतिक है। राम जन्म भूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो कर रहेगा। संघ इसके लिए कटिबद्ध है। यदि समझौते से बात नहीं बनती है तो संसद से कानून पास कराने के लिए केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने मुस्लिमों से इसमें सहयोग करने की अपील की।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन :
देश में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के संबंध में भागवत ने कहा कि संघ का इसका समर्थन प्राप्त है। यह केवल कानून बनाने से दूर नहीं हो सकता है। इसके लिए खुद को बदलना होगा। उन्होंने इसके लिए आंदोलन करने वाले सभी लोगों को एक मंच पर आने की बात कही।
नहीं घट रही शाखाओं की संख्या : भागवत ने कहा कि देश में शाखाओं की संख्या घट नहीं रही है। कहीं कम हुई है तो कहीं ज्यादा। उन्होंने इस बात को माना की जिस गति से शाखाओं की संख्या बढ़नी चाहिए उस गति से नहीं बढ़ रही है। उसमें गति देने की आवश्यकता है। प्रचारकों की संख्या पर कहा कि अभी देश में 2350 प्रचारक है। इनका जीवन बहुत ही कठिन है।
मुस्लिम भी आ सकते हैं शाखा : मुस्लिमों से भी शाखा आने का आह्वान करते हुए कहा, संघ सभी को भारत माता की संतान मानता है। किसी के प्रति भेदभाव नहीं करता है। तथाकथित अल्पसंख्यकों में संघ के बारे में जो गलतफहमी है उसे दूर करना चाहिए। मुसलमानों को हम वोटर नहीं भाई मानते हैं। परन्तु उन्हें भी भाई का रिश्ता निभाना होगा।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन राव भागवत ने कहा कि संघ हिंदुस्तान में रहने वाले सभी नागरिकों को हिंदू मानता है। हमारे देश की पहचान हिंदू है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही कहा है। मन के सारे स्वार्थ व भेदभाव मिटाकर राष्ट्र के निर्माण में ही लगना चाहिए। हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। हिंदू कोई पूजा पद्धति नहीं है। भारत के ईसाई और मुसलमान जब विदेशों में जाते हैं, तो उन्हें हिंदू मुसलमान, हिंदू ईसाई उपनाम से पुकारा जाता है। संघ हिंदुस्तान में रहने वाले सभी नागरिकों को हिंदू मानता है। भले ही उसकी पूजा पद्धति कुछ भी हो।



आरएसएस के सर संघ चालक रांची के सीएमपीडीआई सभागार में प्रबुद्ध जन संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया भारत की ओर देख रही है, लेकिन भारत की वर्तमान स्थिति पर विचार करने की जरूरत है। जब तक देश सुखी नहीं बनता, तब तक अपने सुख का विचार नहीं करना चाहिए।

देश के लिए हो एकता

मोहन भागवत ने कहा कि भारत वह भूमि है, जहां धर्म सर्वत्र विराजमान है। एकता का उपयोग अपने देश को समर्थ बनाने में करना चाहिए, न कि दुनिया को दबाने में। भगवान भी उसी का भाग्य बदलते हैं, जो स्वयं आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ मूलभूत कमियां हो गई हैं। लेकिन समाज की गुणवत्ता और एकता के आधार पर सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है। कार्यक्रम में उन्होंने मेल और एसएमएस से भेजे गए १०० से अधिक सवालों के जवाब दिए।

संघ में आएं, अच्छा लगेगा : भागवत 
 रांची
भले ही गैर भाजपा दल आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से परहेज करें, पर मुसलमानों की नई पीढ़ी संघ को करीब से जानना चाहती है। बुद्धिजीवी मुसलमान भी अपने सवालों को अब जज्ब करना नहीं चाहते और न ही वह किसी दूसरे से इनके जवाब सुनना चाहते हैं। वे सीधे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मुंह से अपने सवालों के जवाब पाने की ख्वाहिश रखते हैं। गुरुवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रबुद्ध जन संवाद में भले ही गैर भाजपा दल का कोई नेता नहीं पहुंचा, पर कई मुसलमान पहुंचे और उन्होंने सवाल पूछे।

हजारीबाग के मो. आरिफ, रांची विवि के प्रो. शाहिद अख्तर, मारवाड़ी हाईस्कूल के शिक्षक शाहनवाज कुरैशी और अमेरिका में रहनेवाले रांची के डॉ. असलम के सवाल देखने में भले ही सीधे लगें, पर ये थे बड़े गूढ़। इन लोगों के अलावा कुमार देवाशीष, डॉ. एचपी नारायण, दयाशंकर सिंह, संतोष मखरिया, संपत मुखर्जी, प्रेमचंद सिंह मुंडा, विकास कुमार सिंह आदि ने भी सवाल पूछे।

अल्पसंख्यकों ने कहा कि वे सबसे पहले एक भारतीय हैं, फिर मुसलमान। संघ में मुसलमानों का क्या स्थान है? देश हित में क्या वे आरएसएस का स्वयंसेवक बन सकते हैं। आरएसएस अल्पसंख्यकों के बीच लोकप्रिय नहीं है इसका क्या कारण है? संघ अल्पसंख्यकों के बीच सेवा का काम क्यों नहीं करता? आरएसएस में अल्पसंख्यकों का आना मना है क्या? आरएसएस का डर दिखाकर अल्पसंख्यकों का वोट कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियां क्यों मांगती हैं?

आरएसएस न भेदभाव करता है, न ही पक्षपात 
सवालों के जवाब देते हुए सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक वाली बात नहीं मानता। हम सब भारत मां के पुत्र हैं और समान पूर्वजों के वंशज। अपनी सांस्कृतिक विरासत एक है। हम सबको अपना मानते हैं। किसी के प्रति भेदभाव नहीं, न ही किसी के प्रति पक्षपात है। अपने जीवन में राष्ट्र के प्रति सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो भी इच्छुक है वह संघ में आ सकता है। भारत माता के प्रति सबका कर्तव्य है।सभी अपना कर्तव्य करें, अधिकार स्वत:मिल जाएगा। आप शाखा में आकर देखिए संघ को। कही-सुनी बातों पर विश्वास करते हैं, इसलिए तथाकथित अल्पसंख्यकों में संघ के बारे में गलतफहमी है। नागपुर के मुसलमानों में संघ के बारे में कोई गलतफहमी नहीं है। राजनीतिक नेता और निहित स्वार्थवाले लोग संघ का हौवा खड़ा करते हैं। वे मुसलमानों और ईसाइयों को डराते हैं कि संघ उन्हें हिंदू बना देगा। पर हमें किसी को हिंदू नहीं बनाना, क्योंकि भारत में रहनेवाले सभी हिंदू हैं। हिंदू होने के लिए मुसलमान होना या ईसाई होना छोडऩा नहीं पड़ेगा। हमें आपकी पूजा पद्धति से नहीं मतलब। आप आओ। आपको यहां अच्छा लगेगा। लेकिन हम आपको हिंदू के नाते बुलाएंगे और हिंदू के नाते ही आपको रखेंगे। अल्पसंख्यक होने का प्रिविलेज भी आपको नहीं मिलेगा। अलगाववाद के षडयंत्र से बाहर निकलने की जरूरत है। हम मुसलमानों को वोटर नहीं मानते, बल्कि रिश्ते में उन्हें भाई मानते हैं। सेवा करते समय हम कोई भेदभाव नहीं करते हैं। आपको हमें देखना है तो आप आइए। आप जब चाहें आ सकते हैं और जा सकते हैं। कोई फीस नहीं, कोई औपचारिक सदस्यता नहीं। आइए संघ को दो साल तक ठीक से, अंदर से अपनी आंखों से देखिए, अपनी राय बनाइए और फिर अपने मन से सोचिए।

सभी पार्टियों में हंै संघ के स्वयंसेवक 
राजनीति से न तो देश बनने वाला है और न ही बचने वाला है। राजनीति शुद्ध रूप से तोड़क तत्वों का अड्डा बन चुका है। जो जीवन में परिवर्तन लाता है, वही संघ का स्वयंसेवक है। यह उद्गार आरएसएस प्रमुख मोहनराव भागवत ने प्रबुद्ध जन संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। मंच पर संघ प्रमुख के अलावा उत्तर पूर्व क्षेत्र के संघचालक सिद्धनाथ सिंह मौजूद थे। स्वागत भाषण प्रांतीय संघ चालक जगन्ननाथ शाही ने दिया। कार्यक्रम का संचालन महानगर संघ चालक अरुण कुमार ने किया।

खचाखच भरे सीएमपीडीआई सभागार में झारखंड प्रदेश आरएसएस संपर्क विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सर संघचालक ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक कांग्रेस, वामदलों और अन्य राजनीतिक दलों में भी हैं। देश को मजबूत करने के लिए उन्होंने हर हिंदुस्तानी को गुण संपन्न होने की बात कही। भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कालाबाजारियों को सरकारी संरक्षण मिल रहा है। आम जनता परेशान है। सर संघचालक ने कहा कि संघ का भाजपा से कोई लेना देना नहीं है। संघ न राजनीति करता है और न ही करेगा।
सेवा ही लक्ष्य 

उन्होंने कहा कि सामान्य जन की सेवा करना ही संघ का मुख्य लक्ष्य है। संघ के स्वयंसेवक दमड़ी घिस-घिस कर देश की सेवा और राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं। इस समय एक लाख तीस हजार स्वयंसेवक देश की एकता और अखंडता बनाए रखने में जुटे हैं। संघ का देश के 50 हजार गांवों में नेटवर्क है। 

घुसपैठ बड़ी समस्या 

भागवत ने कहा कि घुसपैठ देश की सबसे बड़ी समस्या है। इसे रोकना सरकार का दायित्व है। सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में चार बार आदेश दे चुका है कि बाहरियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर किया जाए। वोट बैंक और राजनीतिक स्वार्थ के कारण देश में घुसपैठ बढ़ी है। 
व्यक्तित्व का निर्माण 

शाखाओं में सीधे और सरल दिखने वाले जो कार्यक्रम होते हैं इनसे उत्कृष्ट व्यक्तित्व का निर्माण होता है। नित्य साधना से मनुष्य डिगता नहीं, भटकता नहीं। वह सामथ्र्यवान, संस्कारवान और राष्ट्रभक्त बनता है। शाखाओं में जाकर ही उसे समझा जा सकता है। संघ का एक ही लक्ष्य है राष्ट्र को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाना। 

source: http://epaper.bhaskar.com/ranchi/109/05102012/jarkhand/1/

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives

Recent Stories

Scroll to Top