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हुर्रियत नेता के सच ने मचाई खलबली

नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के आतंकवादी संगठनों के बीच हुर्रियत नेता अब्दुल गनी बट की स्वीकारोक्ति ने हलचल मचा दी है। हालांकि वहां यह ओपन सीक्रेट था कि कश्मीर में बड़े अलगाववादी नेताओं की हत्याओं के पीछे पाक समर्थित आतंकवादियों का हाथ रहा है। लेकिन यह पहली बार हुआ कि बट जैसे बड़े अलगाववादी नेता ने सार्वजनिक रूप से यह तथ्य स्वीकारा कि मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक, अब्दुल गनी लोन और जेकेएलएफ के समर्थक माने जाने वाले प्रो. अब्दुल अहद वानी की हत्या सुरक्षा बलों या पुलिस ने नहीं बल्कि ‘हमारे ही लोगों’ ने की थी।

कश्मीर के दो दशक से ज्यादा पाक समर्थित आतंकवाद के दौर में उन अलगाववादी नेताओं में से कोई भी जिंदा नहीं बचा जिसने आतंकवादियों की हिंसा, धार्मिक कट्टरवाद या पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाया हो। कई उदार और हिंसा की व्यर्थ समझे गए नेताओं की आवाज इसलिए खामोश कर दी गई कि उनकी अमन की बातों का असर कश्मीरी अवाम में होने लगा था। कश्मीर में सबसे पहली राजनीतिक हत्या वहां के सबसे बड़े धार्मिक नेता मीर वाइज फारूक की हुई थी।

मीर वाइज की हत्या के ठीक 12 साल बाद 21 मई 2002 को पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हुर्रियत के सीनियर नेता अब्दुल गनी लोन की हत्या उस समय की गई जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कश्मीर के दौरे पर जाने वाले थे। कश्मीर में जेकेएलएफ के विचारक अब्दुल अहद गुरु, दक्षिण कश्मीर के मीर वाइज काजी निसार, नैशनल कॉन्फ्रेंस के मौलाना मोहम्मद सईद मसूदी, सीपीआई के अब्दुल सत्तार रंजूर, विधायक मीर गुलाम मुस्तफा और पचासों ऐसे नेता संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए जिन्होंने कश्मीर की अवाम की भावनाओं को स्वर देने कोशिश की। पाकिस्तान समर्थक तत्व ऐसी राजनीतिक हत्याओं के बाद सरकार और सुरक्षा बलों पर आरोप लगाकर लोगों को भड़काने की कोशिश करते थे।

उदारवादी लोन हुर्रियत के एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने पाकिस्तान जाकर वहां धार्मिक कट्टरपंथियों को जमकर लताड़ा था। लोन ने पाकिस्तान के शासकों से कहा था कि वे धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखें। लाहौर में लोन ने पाकिस्तान को यह कहकर भारी नाराज कर दिया था कि आप (पाकिस्तान) हमारे राजनीतिक आंदोलन को इस्लामिक रंग देकर उसका फायदा उठाना चाहते हैं। लोन कश्मीर में शांति की वापसी के लिए केन्द सरकार के साथ बातचीत के मुखर पक्षधर थे। लोन की हत्या के बाद हुर्रियत के प्रवक्ता अब्दुल मजीद बांडे ने इस संवाददाता से कहा था कि उन्हें अपनी सचाई की कीमत चुकानी पड़ी।

लोन के साथी रहे बट ने निश्चित रूप से यह कहकर दुस्साहस का परिचय दिया है कि वे सचाई को सामने लाना अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कट्टर पाक समर्थक अलगाववादी नेता सैयद अली साह गिलानी को आत्म निरीक्षण की सलाह देकर कश्मीर के पाक समर्थित तत्वों को आइना भी दिखा दिया।

अलगाववादी राजनीति में आने से पहले लोन मुख्यधारा की राजनीति में थे और जम्मू-कश्मीर में गुलाम मोहम्मद सादिक और मीर कासिम के मंत्रिमंडल में भी रहे थे। उनके बेटे सज्जाद लोन की शादी पीओके में रहने वाले जेकेएलएफ के अध्यक्ष अमानउल्लाह खान की बेटी असमां के साथ होने पर भी पाकिस्तान नाराज था .

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