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हिंदू धर्म दैवीय शक्ति

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व्यक्ति निर्माण का केंद्र, शाखा : राजाराम

शहर सहित तीन स्थानों पर संघ के स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन  
बाड़मेर 4 नवम्बर 12 . 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से रविवार को जिले के तीन स्थानों पर
पथ संचलन निकाला गया। जिसमें स्वयंसेवकों ने अनुशासन और एकता का परिचय
दिया। संघ की पूर्ण गणवेश पहने व कंधे पर दंड साधे चल रहे स्वयंसेवकों को
देख लोगों ने अनुशासन की प्रशंसा की। शहर की गोशाला व रायनगर शाखा के साथ
ही सनावड़ा व सिणधरी में भी पथ संचलन हुए। संचलन की समाप्ति के बाद सनावड़ा
व सिणधरी में हिंदू सम्मेलन भी आयोजित हुए। संचलन का जगह-जगह आमजन ने
पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। 

गोशाला-रायनगर का शाखा संचलन
नगर कार्यवाह ने बताया कि शाखा अनुसार पथ संचलन की कड़ी में तीसरा संचलन
गोशाला व रायनगर शाखा के स्वयंसेवकों ने निकाला। ध्वजारोहण व प्रार्थना के
बाद स्थानीय संघ कार्यालय के आगे से प्रारंभ हुआ पथ संचलन राजेश कटारिया
मार्ग, पांच बत्ती सर्किल, बेरियों का वास, विश्वकर्मा सर्किल, सुमेर
गोशाला, स्टेशन रोड, अग्रवाल मोहल्ला, वैद्यजी की गली व अग्रसेन भवन होते
हुए माहेश्वरी चौक पहुंच संपन्न हुआ। संचलन का जगह-जगह महिलाओं व पुरुषों
ने फूल बरसा स्वागत किया। संचलन के दौरान पुलिस कोतवाल देवाराम मय जाब्ता
साथ रहे।  

सजग प्रहरी के रूप में देश की रक्षा करें

सह खंड कार्यवाह ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-पंद्रह पर स्थित
सनावड़ा गांव में दोपहर 12:30 बजे दयानंद मॉडर्न एकेडमी से प्रारंभ हुआ पथ
संचलन मुख्य मार्गों से होता हुआ श्री महाकालेश्वर महादेव मंदिर पहुंच
संपन्न हुआ। संचलन में सनावड़ा, कगाऊ, मेहलू, हाथीतला, गरल, बाछड़ाऊ,
रामदेरिया व डूगेरों का तला सहित आसपास के गांवों के स्वयंसेवकों ने भाग
लिया। संचलन के बाद हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए महंत जगरामपुरी
महाराज ने भारतीय संस्कृति व परंपरा का निर्वाह करते हुए वर्तमान
परिस्थितियों में संगठित रहने की बात कही। मुख्य वक्ता संघ के विभाग सह
कार्यवाह देरामाराम बिश्नोई प्राचीन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए
बहुसंख्यक हिंदू समाज के समक्ष चुनौतियों का सामना कर सजग प्रहरी के रूप
में देश की रक्षा करने का आह्वान किया। 
  

हिंदू धर्म दैवीय शक्ति



सिणधरी. कस्बे में स्थित कृषि उपज मंडी परिसर से प्रारंभ हुआ पथ संचलन
मुख्य बाजार व मार्गों से होता हुआ संस्कृत विद्यालय पहुंच संपन्न हुआ।
निरंतर प्रवाह में चलने के ध्येय के साथ चल रहे स्वयंसेवकों के स्वागत में
कस्बे वासियों ने तोरण द्वार लगा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसमें आकर्षण
का केंद्र घोष वाहिनी रही, जिसकी ताल पर स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिला
अनुशासन का परिचय दिया। संचलन के बाद संस्कृत विद्यालय में धर्मसभा को
संबोधित करते हुए महंत रुघनाथ भारती महाराज ने व्यक्ति को त्याग व राष्ट्र
हित में जीवन लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म दैवीय
शक्ति है, धर्म परमात्मा की आज्ञा का नाम है और अधर्मी दूसरों के साथ ही
खुद का नाश करता है। बतौर मुख्य वक्ता संघ के विभाग प्रचारक राजाराम ने
बोलते हुए कहा कि संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण का केंद्र है, इसमें खेल के
माध्यम से संस्कारों का बीज बोया जाता है। उन्होंने आगामी वर्ष में स्वामी
विवेकानंद की सार्ध शती वर्ष (150वीं जयंती) के बारे में बताते हुए कहा कि
विवेकानंद के विचारों को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। कार्यक्रम में
मोहन सिंह चारण, व्यापार मंडल अध्यक्ष गणेश माली, अचला राम बेनीवाल, जबर
सिंह महेचा व हमीरसिंह भायल ने भी विचार रखे।
 

साभार:  दैनिक  भास्कर 

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