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संगठित समाज में ही परिवर्तन की प्रबल सम्भावना : सरसंघचालक

संगठित समाज में ही परिवर्तन की प्रबल सम्भावना : सरसंघचालक

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 पटियाला, नवम्बर 26 :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संगठित
समाज में परिवर्तन की प्रबल सम्भावना होती है। देश का भाग्य बनाना समाज पर
निर्भर करता है, इसलिए समाज को संगठित रूप से प्रयास करना होगा। यदि समाज
में एकजुटता नहीं होगी, तो सुधार के लिए बनाई गई कोई भी योजना सफल नहीं हो
सकती।

संघ प्रमुख ने नेतृत्व सम्बंधी धारणा को
अधिक स्पष्ट करते हुए कहा कि नेता बदलने से समाज नहीं बदलता। समाज में
सकारात्मक परिवर्तन करने के लिए समाज मन को बदलने की आवश्यकता होती है। डॉ.
भागवत सोमवार को नगर निगम के ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह को सम्बोधित
कर रहे थे।
सरसंघचालक ने समारोह के आयोजन के सन्दर्भ
में कहा कि इस कार्यक्रम में संघ का प्रचार नहीं किया जाएगा बल्कि संघ के
बारे में संगठनात्मक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत में रहनेवाले
हर एक व्यक्ति का स्वभाव हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप है। व्यक्ति चाहे
किसी भी प्रान्त का वासी हो, परन्तु सब में भाव एक है कि हम सभी एक हैं।
उन्होंने कहा कि संघ में सम्मिलित होना आसान है, पर संघ को समझना कठिन है।
संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाना रहा है।
संघ इसी उद्देश्य को लेकर आज भी समाज को संगठित करने का काम कर रहा है।
इस अवसर पर संघ के जिला संयोजक डॉ.
राजिंदर कुमार, मेयर अमरिंदर सिंह बजाज, सीनियर डिप्टी जगदीश राय चौधरी,
अनिल बजाज सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

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