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राम जन्मभूमि पर हाई कोर्ट का फैसला विचित्र: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली।। अयोध्या में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दी है। जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस आरएम लोधा की बेंच ने इस मामले में सभी पक्षों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को विचित्र और आश्चर्यजन बताया है।

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पिछले साल 30 सितंबर को सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का निर्देश दिया था, जिसमें एक हिस्सा भगवान राम विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को देने का फैसला सुनाया गया था। कोर्ट के इस फैसले पर सभी पक्षों ने असंतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका दाखिल करने वालों में निर्मोही अखाड़ा, भगवान राम विराजमान, अखिल भारत हिंदू महासभा, जमीयत उलेमा- ए- हिंद और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड हैं।

भगवान राम विराजमान की याचिका में भूमि के बंटवारे का विरोध करते हुए कहा गया है कि ईश्वर का बंटवारा नहीं हो सकता। जब एक बार भूमि को राम जन्मभूमि घोषित कर दिया गया है, तो फिर उसे अंदर का हिस्सा, बाहर का हिस्सा या केंद्रीय गुंबद में बांटना गलत है।

भगवान राम विराजमान की अपील में सिर्फ जस्टिस एसयू खान व जस्टिस सुधीर अग्रवाल के फैसले को ही चुनौती दी गई है क्योंकि तीसरे जज डीबी शर्मा ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए फैसला भगवान राम विराजमान के हक में सुनाया था। जमीन के बंटवारे पर एतराज निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा को भी है। उसने भी बंटवारे का फैसला रद्द करने की मांग की है।

यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और जमीयत उलेमा- ए- हिंद ने अपील में कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला सुबूतों पर नहीं बल्कि आस्था पर आधारित है। वक्फ बोर्ड ने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में समानता का मुद्दा भी उठाया है और कहा है कि संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता में सभी धर्मों को बराबरी पर रखा गया है, इसे सिर्फ हिंदुओं की आस्था और विश्वास के संदर्भ में परिभाषित करना गलत है।

वक्फ बोर्ड ने कहा है कि हाईकोर्ट के फैसले में राम जन्मस्थान घोषित करते समय हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के तहत तरजीह दी गई है, लेकिन ऐसा करते समय यह ध्यान नहीं रखा गया कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में दिया गया यह मौलिक अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है।
source: http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/8204663.cms

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