जोधपुर. पश्चिमी राजस्थान में बीते पांच साल में मादक पदार्र्थो की तस्करी में लिप्त 62 फीसदी आरोपी बरी हो गए। जोधपुर स्थित एनडीपीएस मामलात की विशेष अदालत से ज्यादातर आरोपी संदेह का लाभ पाकर कोर्ट से छूटे। यही वजह है कि नशीले पदार्र्थो के कारोबार पर अंकुश लगाने और अपराधियों को सजा दिलाने की सरकारी मुहिम का नतीजा सिफर है।
जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालोर व पाली जिले में स्थित 130 से ज्यादा पुलिस थानों व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पर क्षेत्राधिकार रखने वाली इस विशेष अदालत में पिछले पांच साल में 235 फैसले हुए, इनमें से मात्र 91 मामलों में ही सजा हो पाई। इनमें अफीम, डोडा पोस्त, हेरोइन, चरस व स्मैक जैसे नशीले पदार्र्थो की तस्करी के मामले शामिल थे। जोधपुर स्थित नारकोटिक्स की विशेष अदालत में वर्ष 2005 में 68 प्रतिशत, 2006 में 53 प्रतिशत, 2007 में 77 प्रतिशत, 2008 में 60 प्रतिशत और 2009 में 53 प्रतिशत आरोपी पुलिस के गैर जिम्मेदाराना अनुसंधान व लचर अभियोजन के चलते बरी हुए।