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मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने मालदा घटना को न्यायपालिका को डराने की “सुनियोजित कोशिश” बताया, पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई एक गंभीर घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है, जहां विशेष त्वरित जांच (SIR) ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया गया, रात में हमला किया गया और उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्या कांत ने इसे न्यायपालिका को डराने की “सुनियोजित कोशिश” करार देते हुए राज्य सरकार को लताड़ा और कहा कि “आपके राज्य में सब कुछ राजनीतिकरण हो गया है।”

घटना का पूरा विवरण

मालदा जिले में SIR ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारी और उनकी टीम को प्रदर्शनकारियों ने कई घंटों तक घेर रखा। रात के अंधेरे में उन पर हमला हुआ, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। CJI सूर्या कांत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील से सवालिया लहजे में पूछा, “क्या यह न्यायपालिका को डराने की कोशिश नहीं है? आपके राज्य में कानून का राज खतरे में है।”

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश

कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए:

  • प्रभावित न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश।
  • निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि CBI या NIA से इस मामले की जांच कराई जाए और रिपोर्ट सौंपे।
  • सुनवाई स्थलों पर प्रवेश को 3-5 लोगों तक सीमित करने का आदेश, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
  • राज्य सरकार को न्यायपालिका के अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी याद दिलाई गई।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने सुनाया, जिसमें CJI सूर्या कांत ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में “सब कुछ राजनीतिकरण” हो गया है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और संदर्भ

यह घटना पश्चिम बंगाल में चल रहे राजनीतिक तनाव के बीच हुई है, जहां SIR ड्यूटी चुनावी हिंसा या अन्य संवेदनशील मामलों की जांच से जुड़ी है। विपक्षी दल भाजपा ने राज्य सरकार पर न्यायपालिका को कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे “आंतरिक मामला” बताने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

यह मामला भारत की संघीय संरचना में राज्य सरकारों की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि CBI/NIA जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

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