महिलायें स्वावलंबी बनें व समाज का नेतृत्व करें : संघ प्रमुख
नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कुटुंब
व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि
महिलायें ही परिवार को मजबूती प्रदान कर सकती हैं. इसलिये इस दिशा में
महिलाओं को अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी. रविवार को नागपुर में संघ से जुड़े
विविध संगठनों के महिला प्रतिनिधियों को संघ प्रमुख ने सम्बोधित किया.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने परिवार की निर्णय प्रक्रिया में आगे आना
चाहिये. महिलाओं की सहभागिता से ही परिवार मजबूत बनता है.
व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि
महिलायें ही परिवार को मजबूती प्रदान कर सकती हैं. इसलिये इस दिशा में
महिलाओं को अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी. रविवार को नागपुर में संघ से जुड़े
विविध संगठनों के महिला प्रतिनिधियों को संघ प्रमुख ने सम्बोधित किया.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने परिवार की निर्णय प्रक्रिया में आगे आना
चाहिये. महिलाओं की सहभागिता से ही परिवार मजबूत बनता है.
सरसंघचालक ने महिलाओं को अपनी निर्णय क्षमता बढ़ाने का परामर्श देते हुए
कहा कि संघ चाहता है महिलायें स्वावलंबी बनें व समाज का नेतृत्व करें.
प्रत्येक परिवार में संस्कारों का सिंचन आज की महती आवश्यकता है. इसके लिये
स्वयं को संस्कारक्षम बनाकर अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने में महिलाओं
को अधिक सक्रिय होना होगा. उन्होंने बताया कि हमारे देश में नारी के सम्मान
को प्राचीन काल से सर्वोपरि माना गया है. आज भी हम नदी, भूमि आदि को माँ
कहकर पुकारते हैं. ये हमारे संस्कार हैं. आज इन संस्कारों की अवहेलना हो
रही है. अतः पुरुष वर्ग में प्रबोधन की आवश्यकता है.
कहा कि संघ चाहता है महिलायें स्वावलंबी बनें व समाज का नेतृत्व करें.
प्रत्येक परिवार में संस्कारों का सिंचन आज की महती आवश्यकता है. इसके लिये
स्वयं को संस्कारक्षम बनाकर अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने में महिलाओं
को अधिक सक्रिय होना होगा. उन्होंने बताया कि हमारे देश में नारी के सम्मान
को प्राचीन काल से सर्वोपरि माना गया है. आज भी हम नदी, भूमि आदि को माँ
कहकर पुकारते हैं. ये हमारे संस्कार हैं. आज इन संस्कारों की अवहेलना हो
रही है. अतः पुरुष वर्ग में प्रबोधन की आवश्यकता है.
डॉ.भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण की बातें होती है,
पर हम ये भूल जाते हैं कि महिलायें स्वयं शक्ति स्वरूपा हैं. संघ ने पिछले
कुछ वर्षों से परिवार प्रबोधन का कार्यक्रम शुरू किया है. आज इस कार्यक्रम
को गति देनी है, ताकि हमारा समाज संस्कारक्षम वातावरण में अपना विकास कर
सके.
पर हम ये भूल जाते हैं कि महिलायें स्वयं शक्ति स्वरूपा हैं. संघ ने पिछले
कुछ वर्षों से परिवार प्रबोधन का कार्यक्रम शुरू किया है. आज इस कार्यक्रम
को गति देनी है, ताकि हमारा समाज संस्कारक्षम वातावरण में अपना विकास कर
सके.
रेशमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार भवन में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि वे
अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों के साथ बैठें, बातचीत करें, उनकी सुनें,
अपनी बात कहें और इस तरह से आपसी संवाद से मिलकर कुटुंब व्यवस्था को मजबूत
बनायें. महिलायें जिस क्षेत्र में काम कर रही हैं, वहीं मजबूती के साथ आगे
बढ़कर नेतृत्व करें.
अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों के साथ बैठें, बातचीत करें, उनकी सुनें,
अपनी बात कहें और इस तरह से आपसी संवाद से मिलकर कुटुंब व्यवस्था को मजबूत
बनायें. महिलायें जिस क्षेत्र में काम कर रही हैं, वहीं मजबूती के साथ आगे
बढ़कर नेतृत्व करें.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों पर निर्भर रहने की बजाय उन्हें अपनी
निर्णय क्षमता साबित करनी होगी. महिलाओं को समय के साथ आगे बढऩे की
आवश्यकता है. पुरुषों का रास्ता न देखें कि वे मदद करेंगे. महिलायें और
ताकत के साथ आगे बढ़ें, यही आज की आवश्यकता है.
निर्णय क्षमता साबित करनी होगी. महिलाओं को समय के साथ आगे बढऩे की
आवश्यकता है. पुरुषों का रास्ता न देखें कि वे मदद करेंगे. महिलायें और
ताकत के साथ आगे बढ़ें, यही आज की आवश्यकता है.