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भोगवाद से ग्रस्त अर्थमूलक है आज का समाज : होसबले


भोगवाद से ग्रस्त अर्थमूलक है आज का समाज : होसबले
जागरण संवाददाता, गोरखपुर : मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव राष्ट्र की संकल्पना का आधार तत्व है। राष्ट्रीय आर्थिक चरित्र की रूपरेखा राष्ट्रीय जीवन के अनुकूल होनी चाहिए। वर्तमान युग भोगवाद की पीड़ा से ग्रस्त है जहां केवल अर्थमूलक समाज की कल्पना हावी हो रही है जो व्यापक स्तर पर अमानवीय संघर्षो और शक्ति के दुरुपयोग की कहानी कह रही है। मानव शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समुच्चय है। ऐसे में उसके सर्वागीण विकास के लिए एकांगी नहीं समेकित दृष्टि की आवश्यकता है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने एकात्म मानव दर्शन की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। पं.दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता विषयक इस संगोष्ठी का आयोजन विश्व संवाद केंद्र गोरखपुर और गोरखपुर विवि के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से किया गया था। पं.दीनदयाल के सिद्धांत की चर्चा करते हुए होसबले ने कहा कि व्यक्ति के चरित्र से राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण होता है। ऐसे में एकात्म मानव दर्शन व्यष्टि से समष्टि में समरसता तथा समन्वयक का क्रियान्वयन करता है। त्यागपूर्ण उपभोग की ईशावास्योपनिषद की अवधारणा को धारण करने वाली अर्थव्यवस्था से ही राष्ट्र का कल्याण संभव है और ऐसी अर्थव्यवस्था विकास की वर्तमान अपेक्षाओं की अभिपूर्ति का मार्ग है। एकात्म मानव दर्शन कर्मप्रधान पुरुषार्थ पर बल देता है जो कि त्याग तपोमयी आचरण पद्धति की सांस्कृतिक विरासत धारण करता है। अंत्योदय से सर्वोदय तभी संभव है जब राष्ट्रीय चरित्र की रूपरेखा भोगमयी न होकर योगमयी यानी त्याग की भावना से परिपूर्ण और विकेंद्रित हो। हमारे अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब कर्तव्यों का सजग आचरण हो। संगोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्वाचल विवि जौनपुर के पूर्व कुलपति प्रो.यूपी सिंह ने एकात्म मानव दर्शन की व्याख्या करते हुए वर्तमान समय में इसकी जरूरत पर बल दिया। जबकि अंग्रेजी विभाग की प्रो.विनोद सोलंकी ने कहा कि यह दर्शन एक गहन अनुभति का दर्शन है जो संतुलित विकास के लिए अपरिहार्य है। वहीं प्रश्नोत्तरी सत्र में संघ के सह सरकार्यवाह ने भारत को विभिन्न धर्मो का समुच्चय बताते हुए यहां की विविधता में एकता की विशेषता को खासतौर पर रेखांकित किया।
संगोष्ठी में विश्व संवाद केंद्र की वार्षिक पत्रिका पूर्वा संवाद तथा जागरण पत्रिका ध्येय मार्ग का नए शुभंकर के साथ लोकार्पण भी हुआ। संचालन डा.ओमजी उपाध्याय ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अलावा संघ के पदाधिकारी, अनेक शिक्षाविद् मौजूद रहे।

(Hindi news from Dainik Jagran, 

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