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बक्सर से चेतावनी भरा खुलासा: पीएम मोदी पर हमले की साजिश, गोपनीय PMO डेटा हासिल करने वाले तीन युवक गिरफ्तार

बिहार के बक्सर जिले से एक बड़ा सुरक्षा खुलासा हुआ है, जहां तीन युवकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की साजिश रचने और पीएमओ की गोपनीय जानकारी हासिल करने के आरोप में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने गिरफ्तार कर लिया। विदेशी संपर्कों के जरिए साइबर गतिविधियों से संचालित यह मॉड्यूल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया था, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। गिरफ्तारियों के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं, क्योंकि यह मामला डिजिटल जासूसी और प्रत्यक्ष हमले की योजना को जोड़ता है।
पकड़े गए युवक स्थानीय स्तर पर सक्रिय थे और कथित तौर पर पाकिस्तान या उसके सहयोगी देशों से जुड़े हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे। उन्होंने डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड ऐप्स जैसे टेलीग्राम व सिग्नल के जरिए पीएम के दौरे के शेड्यूल, सुरक्षित स्थानों की जानकारी और PMO के आंतरिक डेटाबेस तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, साजिश में हथियार जुटाने, विस्फोटकों की खरीद और पीएम के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हमला करने का टाइमलाइन तय किया गया था। SIT ने उनके गैजेट्स से विदेशी IP एड्रेस, फंड ट्रांसफर रिकॉर्ड्स और हमले के ब्लूप्रिंट बरामद किए, जो इस साजिश की गहराई को उजागर करते हैं।
बक्सर पुलिस और राज्य की एंटी टेररिस्ट स्क्वायड ने इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर ऑपरेशन चलाया, जिसमें युवकों के घरों पर छापेमारी की गई। आरोपी साइबर स्किल्स वाले तकनीकी विशेषज्ञ थे, जो फिशिंग, मैलवेयर और सोशल इंजीनियरिंग से संवेदनशील डेटा चुराने की कोशिश कर रहे थे। यह घटना भारत में बढ़ते साइबर थ्रेट्स का प्रतीक है, खासकर जब उच्च पदस्थ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा हो। केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में लिया है, और अब NIA व IB को जांच सौंपी जा सकती है। गिरफ्तार युवकों से पूछताछ में बड़े नेटवर्क के सुराग मिलने की उम्मीद है।
यह मामला न केवल बिहार की राजनीति को हिला रहा है, बल्कि पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ पहले भी कई साजिशें नाकाम हो चुकी हैं, लेकिन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल नई चुनौती पेश करता है। राज्य सरकार ने बक्सर समेत संवेदनशील जिलों में साइबर सेल की सक्रियता बढ़ा दी है, जबकि विपक्ष ने इसे इंटेलिजेंस फेलियर बताकर बहस छेड़ दी। आने वाले दिनों में पूछताछ से और खुलासे होंगे, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा सकते हैं।

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