नक्शे-कदम पर चलने लगी है। ब्रिटिश सरकार की “फूट डालो-राज करो” नीति उसे
इतनी पसन्द आ रही है कि स्वतंत्रता मिलने के 64 साल बाद कांग्रेसनीत सरकार
ने उसे फिर आजमाना शुरू कर दिया है। इस नीति पर चलने का ताजा प्रमाण है,
हाल ही में दिया गया वह निर्णय जिसमें कहा गया है कि देश के मुस्लिम बहुल
इलाकों के थानों में कम से कम एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी तैनात किया जाए।
क्या केन्द्र सरकार
ने यह भी विचार किया कि गैर मुस्लिम अधिकारियों पर इसका क्या प्रभाव
पड़ेगा? वरिष्ठ अधिकारियों के सामने कैसी-कैसी जटिल समस्याएं उत्पन्न
होंगी। आज देश के सभी आदिवासी क्षेत्र सर्वाधिक असुरक्षित हैं। वहां एक-एक
आदिवासी अधिकारी क्यों नहीं? इस कानून या आदेश का और कुछ प्रभाव पड़े या न
पड़े, साम्प्रदायिकता की सोच को बढ़ावा अवश्य ही मिलेगा। केन्द्र सरकार ने
मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपना कर शेष भारत को समय-समय पर विमुख ही किया
है। यह आदेश भी उसी आग में, मानसिक रूप में, घी का काम ही करेगा। लोगों के
मन में अनावश्यक शंकाएं भी पैदा करेगा। कांग्रेस की सांसें फूल रही हैं।
ऎसे आदेश से तो कांग्रेस हांफने लग जाएगी।
भुवनेश जैन
साभार: राजस्थान पत्रिका
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