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पांचजन्य आर्गनाइज वेबसाइटों के नवीन स्वरूप का उदघाटन

RSS Sahsarkaryavah Suresh Soni relaunching websites of Panchajanya and Organiser, with Milind Oak
RSS Sahsarkaryavah Suresh Soni relaunching websites of Panchajanya and Organiser, with Milind Oak


नई दिल्ली, 30 सितम्बर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य तथा आर्गनाइजर की वेबसाइट के नवीनीकरण कार्यक्रम का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान के सभागार में किया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कम्प्यूटर बटन दबाकर दोनों वेबसाइटों के नवीनकृत संस्करणों का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश सोनी ने विचारों के प्रसार और प्रचार पर बल देते हुए कहा कि संघ अभी इसमें बहुत पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा जिस समय संघ की स्थापना हुई थी तथा अपने मार्ग पर चला उस समय से ही हमारे पीछे हमारा गलत प्रचार भी शुरु हुआ लेकिन हम बढ़ते रहे। फिर भी समाज में एक वर्ग ऐसा बन जाता, जिसमें हमारे लिए एक गलत धारणा सी बन जाती है, जब वह वर्ग हमारे पास आता है और हमें निकट से जानता है तब उनकी धारणा बदलती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रिंट मीडिया तथा इलैक्ट्रानिक मीडिया से अलग जो आज तीसरा मीडिया है जो इंटरनेट के माध्यम से विकसित हुआ है जिसकी व्यापकता भविष्य में प्रिंट तथा इलैक्ट्रानिक मीडिया से कई गुना अधिक होने वाली है, इसलिए हमें स्वयं को इसके लिए तैयार कर लेना चाहिए जिससे भविष्य में औरों से हम न पिछड़ें। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राममाधव, दिल्ली प्रांत सहसंघचालक श्यामसुन्दर अग्रवाल, आर्गनाइजर के संपादक आर.बालाशंकर, पांचजन्य के संपादक बलदेवभाई शर्मा एवं संघ के कई वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित थे।

पांचजन्य तथा आर्गनाइजर की वेबसाइटों के नवीनीकरण पर पिछले 1 वर्ष से कार्य कर रहे संघ प्रचारक मिलिंद ओक ने कहा कि पांचजन्य को सर्च इंजन में ढूंढने में पहले जो दिक्कत आती थी अब वह दूर कर दी गई है तथा इसमें अब फांट सबंधी समस्या को भी दूर किया गया है। पांचजन्य के पिछले संस्करणों सहित आगे आने वाले संस्करणों को भी अब यूनीकोड फांट से बदला गया है। आनेवाले समय में इन दोनों पत्रों के ई-पेपर संस्करण को वेबसाइटों पर डाले जाएंगे, जिससे विश्व में कहीं भी संघ के विचारों तथा कार्यों की जानकारी पांचजन्य तथा आर्गनाइजर के माध्यम से लोगों को सहजता से प्राप्त हो सकेगी। ई मीडिया के बढ़ते प्रभाव की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रिंट मीडिया आई.टी से लाभ प्राप्त कर अपने को और व्यापक स्वरूप दे सकता है।

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