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नाशिक ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ कांड: TCS BPO में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने का भयावह षड्यंत्र, 7 महिला पुलिसकर्मियों की गुप्त ऑपरेशन से खुलासा

नाशिक शहर से सामने आ रहे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। यह कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का मामला है, जिसमें एक प्रमुख आईटी कंपनी के अंदर महिलाओं को शोषण और धर्मांतरण के लिए टारगेट किया जा रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीसीएस बीपीओ के नाशिक केंद्र में करीब 300 कर्मचारियों में से लगभग 40 लोगों का एक गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप सक्रिय था। इस ग्रुप में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने की खुली योजनाएं बनाई जा रही थीं, जो न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि कार्यस्थल की नैतिकता और महिला सुरक्षा पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब महाराष्ट्र पुलिस ने एक साहसिक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया। सात महिला पुलिसकर्मियों ने खुद को सामान्य कर्मचारी के रूप में भेष बदलकर कंपनी में घुसपैठ की। इन बहादुर अफसरों ने ग्रुप के सदस्यों के साथ बातचीत की और सबूत इकट्ठा किए। एक चौंकाने वाले मामले में तीन युवकों ने एक लड़की को इमेजिका पिकनिक के बहाने ले जाकर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें लीं। इसके बाद उन्होंने जबरन शारीरिक संबंध बनाए और ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी। लगातार धमकियों के जरिए लड़की पर धर्मांतरण का दबाव डाला गया। यह घटना सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई अन्य मामलों का हिस्सा बताई जा रही है, जो संगठित रूप से चल रही थीं।
पुलिस ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं और जांच जारी है। आरोपी कर्मचारी कंपनी के विभिन्न विभागों में काम करते थे और बाहर के लोगों से भी जुड़े हुए थे। व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जा रही बातें इतनी घिनौनी हैं कि इन्हें पढ़कर किसी का भी खून खौल उठे। यह साजिश ‘लव जिहाद’ की उस कथित फिक्शन को चुनौती देती है, जिसे कुछ लोग प्रोपगैंडा बताते रहे हैं। अब उन लोगों की चुप्पी सवालों के घेरे में है, जो ऐसी घटनाओं को नकारते थे।
यह मामला सिर्फ नाशिक तक सीमित नहीं। भारत की टॉप आईटी कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन क्या कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित है? पीओएसएच एक्ट (प्रिवेंशन ऑफ सेक्शुअल हैरासमेंट) के तहत कंपनियों को आंतरिक शिकायत समितियां गठित करनी होती हैं और नियमित जांच करनी पड़ती हैं। लेकिन इस घटना से साफ है कि ये गाइडलाइंस कागजों तक सीमित रह गई हैं। क्या बैकग्राउंड चेक ठीक से हो रहे हैं? क्या व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी है? TCS जैसी बड़ी कंपनी को तुरंत इंटरनल ऑडिट करना चाहिए और अन्य फर्मों को भी सतर्क हो जाना चाहिए।
सरकार की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन केंद्र सरकार को भी पूरे देश में आईटी सेक्टर में समान जांच के आदेश देने चाहिए। एनसीआरबी डेटा बताता है कि कार्यस्थल पर यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं, और ऐसे संगठित गिरोहों का पर्दाफाश जरूरी है। सात महिला पुलिसकर्मियों को सलाम, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर निर्दोष लड़कियों को बचाया। उन अधिकारियों को भी धन्यवाद, जिन्होंने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
अंत में, यह घटना समाज को आईना दिखाती है। महिला सुरक्षा सिर्फ नारे नहीं, बल्कि कड़ी कार्रवाई का विषय है। अगर ऐसे खुलासे बार-बार होते रहे, तो कंपनियों और सरकारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। जरूरत है सख्त कानून, तेज जांच और जागरूकता की। अन्यथा, ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे कांड और बढ़ सकते हैं।

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