इंद्रेश कुमार जी ने कहा की शक्ति पूजा एवं नवरात्रि उत्सव हमें संदेश देता है कि नारी शक्ति स्वरूपा है और जो समाज नारी रूपी शक्ति का सम्मान करता है वही उन्नति कर पाता है। जिस प्रकार शक्ति या ऊर्जा सम्मान करने पर हमारे लिए सहायक होती है किंतु उसके असम्मान से वही शक्ति नष्ट भी कर सकती है।हिंदू समाज को शक्ति सम्पन्न बनने हेतु जाति, वर्ण के नाम पर विकसित कुरीतियों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा की विश्व में किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी राष्ट्रीयता से होती है। इसलिए राष्ट्रीयता का भाव अन्य किसी भी वैशिष्ट्य से सदैव ऊपर रहना चाहिए।
माननीय इंद्रेश कुमार जी के उद्बोधन के बाद द्विधारा पथसंचलन का प्रारंभ ठीक 10.30 बजे स्टेडियम से हुआ। अनुशासित एवं मर्यादित हजारों स्वयंसेवक विभिन्न वाहिनियों के रूप में घोष की ताल के साथ सधे कदमों के साथ दो भिन्न-भिन्न धाराओं में शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गो से होते हुए गुजरे।



