नंद नगरी में अजय कुमार की अध्यक्षता में हुई व्यापक टेबल टॉप एक्सरसाइज ने 2 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया था। इस अभ्यास में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले की सभी प्रमुख एजेंसियों ने एक साथ बैठकर यह परखा था कि किसी भी संभावित शत्रु हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया, समन्वय और नागरिक सुरक्षा कैसे तेजी से लागू की जाएगी।
क्या हुआ था
नंद नगरी के DC ऑफिस कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस टेबल टॉप एक्सरसाइज की अध्यक्षता अजय कुमार, IAS, DM North East, Delhi ने की थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य उस मॉक ड्रिल से पहले सभी प्रक्रियाओं को परखना था, जो 2 अप्रैल 2026 को “hostile attack” पर आधारित नागरिक सुरक्षा अभ्यास के रूप में निर्धारित थी।
इस अभ्यास में दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, दिल्ली पुलिस, भारतीय सेना और NDRF जैसी एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। सभी एजेंसियों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं, कमांड चेन, संसाधन तैनाती और आपसी तालमेल की समीक्षा की थी, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में भ्रम या देरी की गुंजाइश कम रहे।
ब्लैकआउट पर फोकस
सबसे अहम बिंदु रात 8 बजे से लागू होने वाले ब्लैकआउट प्रोटोकॉल थे। उसी समय से सायरन, बिजली बंद करने की प्रक्रिया, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और आपात प्रतिक्रिया इकाइयों को सक्रिय करने की तैयारी की गई थी।
मॉक ड्रिल के दौरान यह परखा जाना था कि यदि हवाई हमले जैसी स्थिति बने, तो जनता कितनी जल्दी निर्देशों का पालन करती है और एजेंसियां कितनी सहजता से एक-दूसरे के साथ काम करती हैं। दिल्ली में जारी नोटिस के अनुसार, अभ्यास 8 बजे के बाद सक्रिय होना था और लोगों को शांत रहने तथा अधिकारियों के निर्देश मानने को कहा गया था।
उत्तर-पूर्व दिल्ली की तैयारी
उत्तर-पूर्व दिल्ली को विशेष रूप से पूर्ण तैयारियों के मोड में रखा गया था। नंद नगरी जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में इस तरह की टेबल टॉप एक्सरसाइज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई, क्योंकि यहां निकासी, संचार, भीड़ नियंत्रण और त्वरित राहत कार्यों की व्यावहारिक चुनौतियां अधिक होती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया था कि ब्लैकआउट, चेतावनी सायरन, नियंत्रण कक्षों की भूमिका और मौके पर पहुंचने वाली टीमों की जिम्मेदारियां पहले से स्पष्ट हों। इसका उद्देश्य सिर्फ एक ड्रिल करना नहीं, बल्कि वास्तविक संकट में तत्काल, समन्वित और अनुशासित प्रतिक्रिया की क्षमता बनाना था।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य
दिल्ली की इस सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का मूल लक्ष्य नागरिक सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा लेना था। इसमें यह देखा जाना था कि DDMA, पुलिस, सेना, NDRF और अन्य एजेंसियां एक संभावित दुश्मन हमले, हवाई खतरे या आपदा जैसी स्थिति में कितनी तेजी से एक-दूसरे के साथ समन्वय कर सकती हैं।
ऐसे अभ्यास आम तौर पर जनता को सतर्क और प्रशिक्षित करने, प्रशासनिक कमियों की पहचान करने, और भविष्य की तैयारियों को मजबूत करने के लिए किए जाते हैं। दिल्ली में 2 अप्रैल की शाम 8 बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया इसी तैयारी का हिस्सा थी।
साझा संदेश
इस अभ्यास ने यह संदेश दिया था कि आपात स्थिति में केवल एक विभाग नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था एक साथ काम करती है। ब्लैकआउट प्रोटोकॉल, अलर्ट सिस्टम, राहत टीमों की तैनाती और नागरिकों की प्रतिक्रिया—इन सभी को एक समन्वित ढांचे में परखा गया था।
Under the chairmanship of Ajay Kumar, a comprehensive Table Top Exercise was conducted at Nand Nagri to finalize preparations for the Civil Defence Mock Drill on hostile attack scheduled for 02.04.2026.
— OsintTV 📺 (@OsintTV) April 2, 2026
Key agencies including Delhi Disaster Management Authority, Delhi Police,… pic.twitter.com/fqgjiZ38Qd