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दादा भाई के देह दान के पूर्व नेत्र दान

जयपुर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ कार्यकर्ता और संघ प्रचारक गिरिराज शास्त्री (दादा भाई) का मंगलवार को निधन हो गया। वे 92 साल के थे।

उन्होंने सुबह 4 बजे जयपुर में मालवीय नगर स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। संघ सूत्रों ने बताया कि दादा भाई ने देहदान का संकल्प ले रखा था। बुधवार सुबह आदर्श नगर के सूरज मैदान में पुष्पांजलि और देहदान कार्यक्रम रखा गया है। उनकी देह सवाई मानसिंह अस्पताल के एनाटोमी विभाग को दान की जाएगी। इससे पहले मंगलवार को उनके नेत्र दान किए गए।

9 सितंबर, 1919 को जन्मे दादा भाई मूलत: भरतपुर जिले में कामां के रहने वाले थे। वे जयपुर के रथखाना स्कूल में अध्यापक भी रहे। उन्होंने यहां नथमल जी के कटले में नियमित शाखा लगाने की शुरुआत की। वे 1992 से 1995 तक राजस्थान के संपर्क प्रमुख और 1995 से 1998 तक राजस्थान के प्रचार प्रमुख रहे।

जुलाई 1946 से दिसंबर 1946 तक सीकर के नगर प्रचारक, जनवरी 1947 से 1948 तक सीकर के जिला प्रचारक और 1948 से 1950 तक सीकर तथा झुंझुनूं जिले के प्रचारक रहे। इसके बाद वे जयपुर आ गए। वे पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष रहे। साथ ही जुलाई 1950 से 1951 तक जयपुर के नगर कार्यवाह, 1951 से 1952 तक जयपुर के जिला कार्यवाह, 1952 से 1953 तक जयपुर विभाग कार्यवाह और 1953 से 1992 तक राजस्थान के प्रांत कार्यवाह रहे। 1992 से 1995 तक राजस्थान के संपर्क प्रमुख और 1995 से 1998 तक राजस्थान के प्रचार प्रमुख रहे।

http://rssjaipur.blogspot.in/2012/03/1332012.html

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