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तेलंगाना की पावन धरा पर ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का उद्घाटन: हेडगेवार जी की पुण्यभूमि बनेगी प्रेरणा तीर्थ

तेलंगाना के कंदकुर्ति गांव में स्थित त्रिवेणी संगम की पवित्र भूमि अब एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। यह वही पुण्यभूमि है जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के पूर्वजों का मूल निवास था। 11 अप्रैल 2026 को इसी धरा पर ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के करकमलों द्वारा संपन्न होगा। यह मंदिर न केवल हेडगेवार जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाएगा, बल्कि राष्ट्रसेवा और हिंदुत्व के प्रेरणा स्रोत के रूप में लाखों स्वयंसेवकों व भक्तों के लिए तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होगा।
कंदकुर्ति गांव तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में गोदावरी, तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा एक शांतिपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र है। प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध यह स्थान धार्मिक महत्व का केंद्र रहा है, जहां तीर्थयात्री संगम स्नान के लिए आते रहे हैं। इसी पावन भूमि पर डॉ. हेडगेवार जी के पूर्वज निवास करते थे, जिनकी वीरता और धर्मनिष्ठा की गाथाएं पीढ़ियों से गूंज रही हैं। डॉ. हेडगेवार जी का जन्म नागपुर में हुआ था, लेकिन उनके कुल का मूल यह तेलंगाना का यह गांव ही रहा। संघ के संस्थापक के रूप में उन्होंने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जो आज विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी संस्था बन चुकी है। उनके जीवन और संघर्षों से प्रेरित होकर यह मंदिर उनके नाम से स्फूर्ति का प्रतीक बनेगा, जो राष्ट्र निर्माण के उनके दर्शन को जीवंत रखेगा।
‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का निर्माण संघ के समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा वर्षों की मेहनत से पूरा हुआ है। मंदिर का वास्तुशिल्प परंपरागत द्रविड़ शैली में तैयार किया गया है, जिसमें डॉ. हेडगेवार जी की प्रतिमा, उनके जीवन पर आधारित चित्रकलाएं और संघ के आदर्शों को दर्शाने वाले शिलालेख प्रमुख होंगे। मंदिर परिसर में ध्यान कक्ष, पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र भी होंगे, जहां युवा पीढ़ी राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सेवा भावना की शिक्षा ग्रहण कर सकेगी। उद्घाटन समारोह में देशभर से संघ के पदाधिकारी, स्वयंसेवक और भक्तजन शामिल होंगे। डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन से यह अवसर और भी प्रेरणादायी बनेगा, जो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हिंदू समाज को एकजुट करने का संदेश देगा।

यह मंदिर केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणा तीर्थ होगा। डॉ. हेडगेवार जी ने संघ को राष्ट्र को मजबूत बनाने का माध्यम बनाया, और यह स्थान उनके उस संकल्प को साकार करेगा। तेलंगाना सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी इस परियोजना को पूर्ण सहयोग दिया है, जिससे यह क्षेत्र पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से भी विकसित होगा। आने वाले समय में कंदकुर्ति गांव स्वयंसेवकों का प्रमुख गंतव्य बनेगा, जहां लोग हेडगेवार जी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा का संकल्प लेंगे।
इस उद्घाटन से संघ का दक्षिण भारत में प्रभाव और मजबूत होगा, तथा डॉ. हेडगेवार जी की जयंती पर यहां विशेष आयोजन होंगे। यह घटना भारतीय संस्कृति की निरंतरता को दर्शाती है, जहां अतीत की महान विभूतियां भविष्य को दिशा प्रदान करती रहती हैं।

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