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जरूरी है आजादी के प्रति निष्ठा : माधव

lpr111999383 largeस्त्रोत: http://epaper.bhaskar.com/epapermain.aspx?eddate=4%2f15%2f2011&edcode=201
“परिवार और मंदिर भी तैयार करें श्रेष्ठ व्यक्तित्व”

पाली।१४ अप्रैल २०११। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राम माधव ने कहा है कि श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण की जिम्मेदारी केवल स्कूल की नहीं है। परिवार और मंदिर भी इसमें जिम्मेदार हैं। इन तीनों का वातावरण और शिक्षण श्रेष्ठ होने पर ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व तैयार होंगे। वे गुरूवार शाम पाली के अग्रसेन भवन में प्रबुद्ध नागरिक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

“वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिन्तन” विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा विश्व सुख और शांति के लिए भारत की ओर देख रहा है। डॉ. अम्बेडकर को याद करते हुए माधव ने उन्हें लोकतांत्रिक भारत का स्तम्भ बताया। चीन और भारत के सन्बन्धों में सुधार पर चर्चा करते हुए उन्होंने वहां के लोगों को मशीन के पुर्जे की संज्ञा दी जो सोचने के लिए स्वतंत्र नहीं होते। उन्होंने कहा कि आज विदेशी लोग हिन्दू संस्कृति अपना रहे हैं, यह हमारे देश की महान संस्कृति की विशिष्टता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहुत शक्ति है। आपातकाल के अठारह माह के बाद भी जनता ने लोकतंत्र को स्थापित किया।

इसका ताजा उदाहरण अन्ना हजारे को मिला समर्थन है। उन्होंने इस दौरान लोगों द्वारा पूछे गए भारत-पाक संबंध और क्रिकेट, महिला जागरूकता, हिन्दू, गोरक्षा, शिक्षा प्रणाली, लोकतंत्र की स्थिति और सुधार की संभावनाएं, अखण्ड भारत और गांधी-जिन्ना, लोकपाल बिल और अन्ना हजारे समेत कई मुद्दों से जुड़े प्रश्नों का भी जवाब दिया। अध्यक्षता कर रहे बार कौंसिल के जिलाध्यक्ष शैतानसिंह ने भी संबोधित किया। आरएसएस के जिला संघचालक डॉ. श्रीलाल ने आभार जताया। संचालन मुकेश कुमार ने किया। यहां लगाई हुई विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षक रही। इस दौरान बड़ी संख्या में शहर के लोग उपस्थित रहे।
“गधा है सेक्युलर”
“मध्यप्रदेश में बच्चों को वर्णमाला सिखाने के लिए “ग” से “गणेश” सिखाया जाता था। कुछ राजनीतिज्ञों ने इसे सेक्युलरिज्म का विरोध मानते हुए शिक्षा का भगवाकरण बताया। वर्णमाला में “ग” अक्षर के ज्ञान के लिए ऎसा शब्द खोजने पर मशक्कत चली जो सेक्युलरिज्म का विरोधी नहीं हो। बुद्धिजीवियों को ऎसा शब्द केवल “गधा” मिला जो सेक्युलर है।” देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के हालात पर एक सवाल के जवाब में राम माधव ने यह चुटकी ली। इस पर आयोजन स्थल ठहाकों से गूंज उठा।
स्त्रोत: http://www.patrika.com/news.aspx?id=572659

जरूरी है आजादी के प्रति निष्ठा : माधव

पाली

भारत में वाइब्रेंट किस्म का लोकतंत्र है। साधनों की पवित्रता से लोकतंत्र सफलता से चल रहा है। इसमें आ रही कमियों को दूर करने के लिए कभी- कभी तत्काल हल भी निकल आते हैं। ये बात आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राम माधव ने अपने उद्बोधन में कही।

वे गुरुवार अपराह्न स्थानीय अग्रसेन भवन में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन विषय पर प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। लगभग 50 मिनट के अपने भाषण में माधव ने आजादी के पहले भारत में लोकतंत्र की कल्पना, इसके संभावित स्वरूप तथा आजादी के बाद से लोकतंत्र की यात्रा तक को तथ्य और उदाहरणों के साथ बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के प्रति निष्ठा और उसके लिए अपनाए जाने वाले साधनों के औचित्य पर गहन चिंतन जरूरी है। इंजीनियरिंग और राजनीति विज्ञान के छात्र रहे माधव ने 20वीं सदी को शासन- प्रशासन के नजरिए से विश्व को ही प्रयोगशाला बना देने वाली करार दिया। इसी दौर में साम्यवाद, पूंजीवाद, जेहाद, लोकतंत्र, राजा- महाराजा आदि कई राज प्रयोग हुए। उन्होंने व्यवस्था के हिसाब से विश्व को भौतिकवाद से बचाने के कई उपयोगी सुझाव भी दिए।
स्त्रोत :http://epaper.bhaskar.com/epapermain.aspx?eddate=4%2f15%2f2011&edcode=201

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