अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अनोखा कदम उठाया है। गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर बीएसएफ बांग्लादेश सीमा के दलदली और नदीय क्षेत्रों में मगरमच्छों तथा जहरीले सांपों की तैनाती पर विचार कर रही है। यह ‘नेचुरल बैरियर’ रणनीति घुसपैठियों को खदेड़ने और सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने का प्रयास है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने हालिया उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। बांग्लादेश से सटी 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पर नदियां, जंगल और दलदल घुसपैठ का बड़ा रास्ता बन चुके हैं। पारंपरिक बाड़बंदी और ड्रोन निगरानी के बावजूद रोहिंग्या और अन्य घुसपैठिए इन इलाकों का फायदा उठाते रहे हैं। अब BSF विशेषज्ञ टीमों के साथ वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद से इन प्राकृतिक शिकारियों को नियोजित तरीके से तैनात करने की योजना बना रही है।
दलदली इलाकों में ‘प्राकृतिक हथियार’
प्रस्ताव के तहत, सुंदरबन जैसे दलदली क्षेत्रों में मगरमच्छों को रिलोकेट किया जाएगा। ये विशालकाय सरीसृप पानी और कीचड़ में घुसपैठियों के लिए घातक साबित होंगे। इसी तरह, जहरीले सांप जैसे कोबरा और वाइपर को घने जंगलों और नदी किनारों पर छोड़ा जाएगा। BSF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह इको-फ्रेंडली तरीका है। मगरमच्छ और सांप स्वाभाविक रूप से इन इलाकों के निवासी हैं, बस उनकी संख्या बढ़ाकर घुसपैठ रोकेंगे।”
पहले चरण में असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की 200 किलोमीटर सीमा पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। वन्यजीव विभाग और WWF जैसी संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। ट्रेनिंग के दौरान BSF जवान इन जीवों के व्यवहार को मॉनिटर करेंगे, ताकि कोई हादसा न हो।
घुसपैठ की चुनौती और नई रणनीति का महत्व
पिछले पांच वर्षों में बांग्लादेश सीमा से 2 लाख से अधिक घुसपैठिए पकड़े गए हैं। रोहिंग्या संकट और बांग्लादेश में अस्थिरता ने समस्या बढ़ाई है। अमित शाह ने संसद में कहा था, “सीमा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हर संभव तरीके अपनाएंगे।” यह फैसला उन्नत तकनीक जैसे AI ड्रोन और थर्मल कैमरों के साथ मिलकर काम करेगा।
विपक्ष ने इसे ‘अजीबोगरीब’ बताते हुए सवाल उठाए, लेकिन भाजपा ने इसे ‘इनोवेटिव सॉल्यूशन’ कहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लागत प्रभावी होगा, क्योंकि मगरमच्छों की देखभाल में फेंसिंग से कम खर्च आएगा। हालांकि, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी कि जीवों का दुरुपयोग न हो।
यह कदम भारत की सीमा सुरक्षा में नया अध्याय जोड़ेगा, और आने वाले महीनों में परिणाम दिखने लगेंगे। गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रोजेक्ट जून तक शुरू हो जाएगा।